हिमाचल की अर्थव्यवस्था को निगल गया कोरोना, सकल घरेलू उत्पाद माइनस 6.2 फीसदी 

By: Mar 6th, 2021 12:12 am

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों ने डराया, सकल घरेलू उत्पाद माइनस 6.2 फीसदी 

मस्तराम डलैल — शिमला

कोविड-19 महामारी का भयंकर असर हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद माइनस 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है। पर्यटन तथा परिवहन के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से डगमगाई है। कृषि-बागबानी की हिस्सेदारी में भी विपरीत असर दिखा है। इसके अलावा इंडस्ट्री में नेगेटिव ग्रोथ प्रचंड रूप से बढ़ा है। शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया गया। बजट सत्र से एक दिन पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह आर्थिक सर्वेक्षण सदन में रखा।  इस आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था पर कोरोना का असर साफ  झलक रहा है। सर्वेक्षण के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद एक लाख 62 हजार 816 करोड़ था। सकल घरेलू उत्पाद 2018-19 में एक लाख 49,422 करोड़ था। मगर 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद में माइनस 6.2 फीसदी की गिरावट दर्ज होने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण में प्रदेश में कृषि व पशुधन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में 2019-20 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज के साथ यह 10583 करोड़ सकल मूल्य वर्द्धित था।

 बागबानी प्रदेश की आर्थिक का आधार है, मगर 2020-21 में बागवानी उत्पादन में 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। लिहाजा इस क्षेत्र में 3.1 फीसदी का संकुचन हुआ। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों की भागीदारी 2015-16 के 15.89 फीसद से घट कर 2020-21 में 13.62 फीसद रह गई। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। प्रदेश में विदेशी एवं घरेलू पर्यटकों की आमद में 81.33 फीसदी की कमी 2020 में देखी गई। पर्यटकों की आमद घटने का असर सीधा सीधा होटल व रेस्तरां के कारोबार पर पड़ा। इसमें 3.2 फीसद का संकुचन हुआ। पर्यटन के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र भी कोरोना से प्रभावित हुआ। कोरोना के चलते प्रदेश में सड़क, जल तथा हवाई परिवहन क्षेत्र में 28 फीसद की नकारात्मक वृद्धि हुई । कोरोना के चलते लागू लॉक डाउन का असर रोजगार पर भी पड़ा तथा लोगों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई। कोरोना काल में प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होने की वजह से इस क्षेत्र में संकुचन हुआ। 2019-20 में जहां प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में 0.3 फीसदी की सकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई थी, वहीं 2020-21 में इसमें 14.2 प्रतिशत का संकुचन हुआ। कमोवेश यही स्थिति खनन क्षेत्र की भी रही। खनन क्षेत्र में चालू माली साल में 18.4 फीसद का नकारात्मक वृद्धि  हुई। विनिर्माण क्षेत्र में बीते साल के 29.18 फीसद के मुकाबले 2020-21 में करीब तीन फीसदी की कमी के साथ 26.94 प्रतिशत रहने का अनुमान है। निर्माण क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत का संकुचन हुआ।

 अर्थव्यवस्था में संकुचन के बावजूद प्रदेश में राजस्व प्राप्तियों में 2019-20 के मुकाबले बढ़ोतरी देखी गई। 2019-20 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले राजस्व प्राप्तियों की दर 19.86 प्रतिशत के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में इनका 24.56 प्रतिशत रहने का अनुमान है। प्रदेश के कर राजस्व में दो प्रतिशत से अधिक इजाफा इस साल हुआ, जबकि गैर कर राजस्व बीते साल के मुकाबले एक प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.54  प्रतिशत तक पहुंच गया। कोरोना काल के बावजूद प्रदेश में राजकोषीय घाटे में कमी दर्ज की गई। 2019-20 में प्रदेश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.53 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष में यह घट कर 4.56 फीसदी रहा। राज्य के राजस्व तथा पूंजीगत व्यय में भी इजाफा दर्ज हुआ। कोविड काल में बच्चों को ऑन लाइन शिक्षा प्रदान करने तथा कोविड से निपटने के लिए स्वास्थ्य अधोसरंचना विकसित करने की वजह से सामाजिक सेवा क्षेत्र में खर्चों में वृद्धि दर्ज हुई। सामाजिक सेवा क्षेत्र में 2014-15 में प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद का 7.68 प्रतिशत खर्च सामाजिक सेवा क्षेत्र में हुआ, मगर चालू वित्त वर्ष में यह 10.89 प्रतिशत हो गया। जाहिर है कि शुक्रवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कोविड काल में हुई कटौतियों और रोजगार के अवसर समाप्त होने के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक जोर दिए जाने का असर साफ दिखा है।

प्रति व्यक्ति आय भी धड़ाम

हिमाचल में प्रति व्यक्ति आय भी धड़ाम से नीचे गिरी है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमानों के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय एक लाख 83 हजार 286 रुपए है।  इसके चलते इसमें 3.7 प्रतिशत गिरावट होने की संभावना जताई गई है। पिछले वर्ष राज्य की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 90 हजार 407 रुपए आंकी गई थी। जाहिर है कि आर्थिक सर्वेक्षण में कोविड काल में हुई वेतन कटौतियों और रोजगार के अवसर समाप्त होने का साफ असर दिखाई दे रहा है।

महंगाई के साथ बढ़ा टैक्स भार

चालू वित्त वर्ष में प्रदेश में मुद्रा स्फीति की दर भी 2019-20 के 3.5 फीसदी से बढ़कर 5.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। मुद्रा स्फीति की दर बढ़ने से साफ  है कि महंगाई बढ़ी है। प्रदेश के कर राजस्व में दो प्रतिशत से अधिक इजाफा इस साल हुआ, जबकि गैर कर राजस्व बीते साल के मुकाबले एक प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.54  प्रतिशत तक पहुंच गया।

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