गिरिपुल में मछली के शौकीन लगा रहे साइजोथ्रेक्स-महाशीर के चटकारे

By: Dec 3rd, 2021 12:55 am

राजगढ़-सोलन-पुलवाहल रोड पर चलने वाली बसों में सफर करने वाले यात्री खूब उठाते हैं स्वाद का मजा, हर रोज आधा क्विंटल से ज्यादा की खपत

बीआर चौहान-यशवंतनगर
बीते कई दशकों से गिरिपुल अर्थात यशवंतनगर मछली आहार के लिए प्रदेश में मशहूर है। बता दें कि राजगढ़-सोलन-पुलवाहल रोड पर चलने वाली बसों का गिरिपुल में भोजन के लिए अस्थाई ठहराव होता है और अधिकांश सवारियां होटलों में मछली खाने के लिए पैक हो जाती हैं। यही नहीं विभिन्न क्षेत्रों से फिश खाने के शौकीन व्यक्ति स्पेशल गिरिपुल आते हैं। विशेषकर सैलानी गिरि नदी में तैरने का मनोरंजन लेने के उपरांत होटल में बैठकर चावल मछली का आनंद लेते हैं। कुछ लोग मछली के पकौड़े खाना भी पसंद करते हैं और पैक करके अपने घरों को भी ले जाते हैं। बता दें कि गिरि नदी में पाई जाने वाली साइजोथ्रेक्स और महाशीर किस्म की मछली खाने में सबसे अधिक स्वादिष्ट होती है। गिरिपुल के एक ढाबा मालिक सतीश कश्यप का कहना है कि उनके ढाबा पर प्रतिदिन औसतन 50 से 60 किलोग्राम मछली की खपत हो जाती है। उन्होंने बताया कि पकौड़े के लिए सिलवा अर्थात छोटी किस्म की मछलियां प्रयोग की जाती हैं। चिकित्सा विज्ञान में मछली को पूर्ण आहार माना जाता है। सहायक निदेशक मत्स्य विभाग सिरमौर का कार्यभार देख रहे डा. सोमनाथ पटियाल ने बताया कि मछली में सभी खनिज तत्त्व मौजूद हैं जोकि मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मछली में प्रोटीन, विटामिन और ओमेगा-3 पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इनका कहना है कि मछली उत्पादन के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभार्थी को 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति व महिलाओं को 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सिरमौर जिला में सालाना करीब 1600 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। उपनिरीक्षक मत्स्य अमी चंद ने बताया कि यशवंतनगर व सनौरा के होटलों में प्रतिदिन डेढ़ क्विंटल मछली की खपत होती है, जिससे स्थानीय मछुआरों को घरद्वार पर रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि गिरि नदी के दोनों ओर मछली का कारोबार करने वाले को विभाग द्वारा 200 से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें से अकेले 50 से अधिक लाइसेंस गिरिपुल क्षेत्र में दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मछली प्रजनन के दौरान हर वर्ष 16 जून से 16 अगस्त तक मछली के पकडऩे पर प्रतिबंध लगाया जाता है। मछुआरों को जाल से मछली पक डऩे की अनुमति दी गई है। हालांकि गिरि नदी में चोरी छिपे अनेक प्रतिबंधित तरीकों जिसमें पानी में बिजली का करंट अथवा विस्फोटक सामग्री डालकर मछली का आखेट किया जाता  है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मछुआरों को जाल व अन्य सामान नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अतिरिक्त मछुआरों के लिए बीमा योजना भी सरकार द्वारा कार्यान्वित की गई है। (एचडीएम)