बागियों ने शुरू की सरकार बनाने की कवायद, भाजपा को समर्थन के जल्द ऐलान की अटकलें

By: Jun 26th, 2022 12:10 am

वडोदरा में मिले एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़णवीस

एजेंसियां — बडोदरा
महाराष्ट्र में सियासी संग्राम के बीच बागी गुट के विधायकों ने सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। शिवसेना के बागी नेताओं के लीडर और विधायक एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस के बीच शुक्रवार रात मुलाकात हुई है। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली है कि अमित शाह भी उस वक्त वडोदरा में थे। हालांकि अभी यह कह पाना मुश्किल है कि अमित शाह भी इस मुलाकात में शामिल थे या नहीं? इस जानकारी के सामने आते ही यह चर्चाएं तेज हो गई हैं कि शिवसेना से बगावत करने के बाद शिंदे क्या जल्द ही भाजपा को अपने समर्थन का ऐलान कर सकते हैं? दोनों के बीच क्या खिचड़ी पक रही है? सूत्रों के मुताबिक वडोदरा में फड़णवीस से मुलाकात के बाद शिंदे रात में ही गुवाहाटी लौट आए।

वहीं शनिवार सुबह शिंदे गुट ने दावा कर दिया कि उसके पास 38 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे दलबदल कानून उन पर लागू नहीं होगा। सूत्र बता रहे हैं कि इस घटनक्रम के सामने आने के बाद महाराष्ट्र में भाजपा ने शिंदे गुट के साथ सरकार बनाने की तैयारी तेज कर दी है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि असम के गुवाहाटी में शिवसेना के 38 बागी विधायकों के साथ डेरा जमाए एकनाथ शिंदे ने गुजरात जाकर वडोदरा में भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। ऐसी जानकारी सामने आई है कि मुलाकात के लिए रात साढ़े 10 बजे देवेंद्र फड़णवीस मुंबई से निकले थे। सूत्रों के जानकारी मिली है कि दोनों नेता चार्टर प्लेन से वडोदरा पहुंचे थे। एकनाथ शिंदे गुवाहाटी से वडोदरा के लिए निकले। जबकि फडणवीस मुंबई से रात साढ़े दस बजे निकले। दोनों नेताओं के बीच देर रात दो बजे मुलाकात हुई थी। ये भी जानकारी सामने आ रही है कि दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे बातचीत हुई। क्या बात हुई, हालांकि इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

16 बागियों को नोटिस, कल तक वक्त

मुंबई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अब शिंदे गुट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई में उतर आए हैं। शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चार प्रस्ताव पास हुए, जिसमें शिंदे गुट पर कड़े ऐक्शन की राह खुल गई है। उधर, डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने शिंदे समेत 16 बागियों को नोटिस जारी किया है। विधायकों की सदस्यता रद्द करने से पहले जवाब देने के लिए 27 जून शाम साढ़े पांच बजे तक का वक्त दिया है। उधर शिवसेना ने कहा है कि वह चुनाव आयोग से अपील करेगी कि बालासाहेब के नाम का इस्तेमाल कोई और न करे।