भाजपा के हुए पवन काजल और लखविंद्र राणा, नई दिल्ली में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ज्वाइन की पार्टी

By: Aug 17th, 2022 4:15 pm

विशेष संवाददाता-शिमला

विधायक पवन काजल और लखविंद्र राणा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। दिल्ली में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में दोनों विधायकों ने भाजपा का दामन था लिया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा प्रदेश में मजबूत हो रही है। पौने पांच साल में लोगों का विश्वास पार्टी पर बढ़ा है। इस मौके पर कांगड़ा के विधायक पवन काजल ने कहा कि लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र का वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वहां लोग उन्हें भाजपा में भेजना चाह रहे थे। इस मौके पर नालागढ़ के विधायक लखविंद्र राणा ने कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व परिवारवाद के सहारे चल रहा है। दोनों जगह किसी भी आम कार्यकर्ता को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।

दोनों कांग्रेस से बर्खास्त
कांग्रेस ने पवन काजल और लखविंद्र राणा दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया है। दिल्ली में भाजपा का पटका ओढ़ते ही कांग्रेस ने यह कार्यवाही की है। दोनों विधायकों को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है। कांग्रेस ने दोनों विधायकों को आगामी छह सालों तक कांग्रेस में शामिल न करने की बात कही है। इस संबंध में प्रदेश मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला ने यह आदेश जारी किए हैं। इसके साथ कांग्रेस ने ब्लॉक समिति कांगड़ा को भी तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया है। कांग्रेस इस मामले पर अब आगामी रणनीति बना रही है। बीते 48 घंटे से विधायकों के भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अचानक दिल्ली जाने के बाद हिमाचल में राजनीतिक गलियारों में विधायकों के दल बदलने की चर्चा तेज हो गई और बुधवार को मुख्यमंत्री की अगुवाई में दिल्ली में दोनों विधायक भाजपा में शामिल हो गए।

पहले भी भाजपा से जुड़े रहे हैं काजल
विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में कांग्रेस के किले में सियासी सेंध लगाने कामयाब हो गई है। कांगड़ा सदर से विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पवन काजल अब भाजपा के हो गए हैं। बता दें कि विधायक पवन काजल पूर्व में भाजपा से जुड़े रहे हैं, लेकिन जिताऊ होने के बावजूद काजल को टिकट न देकर किनारे कर दिया गया था। इसके चलते उन्होंने आजाद चुनाव जीत लिया था। अब भाजपा के भीतर माहौल बदलने के बाद काजल की फिर से पार्टी में वापसी हुई है।