मार्गशीष अमावस्या : पूर्वजों के पूजन का दिन

By: Nov 19th, 2022 12:30 am

अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य आदि भी संपन्न किए जाते हैं जिनका हिंदू धर्म में बड़ा महत्त्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन माना गया है…

अगहन अमावस्या

मार्गशीर्ष अमावस्या को एक अन्य नाम ‘अगहन अमावस्या’ से भी जाना जाता है। यह अमावस्या मार्गशीर्ष माह में पड़ती है। इस अमावस्या का महत्त्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी का पूजन कर दीपावली मनाई जाती है, उसी प्रकार इस दिन भी देवी लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है। इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान, दान और अन्य धार्मिक कार्य आदि भी संपन्न किए जाते हैं जिनका हिंदू धर्म में बड़ा महत्त्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन माना गया है…

धार्मिक मान्यताएं

मार्गशीर्ष का महीना श्रद्धा एवं भक्ति से पूर्ण होता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह माह कई धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। मार्गशीर्ष माह की अमावस्या का बहुत ही विशेष स्थान है। इस माह में भगवान श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्त्व होता है और पितरों की पूजा भी की जाती है। इस दिन पितर पूजा द्वारा पितरों को शांति मिलती है और पितर दोष का निवारण भी होता है। मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि प्रत्येक धर्म कार्य के लिए अक्षय फल देने वाली बताई गई है, किंतु पितरों की शांति के लिए इस अमावस्या पर व्रत पूजन का विशेष लाभ मिलता है। जो लोग अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति, सद्गति के लिए कुछ करना चाहते हैं, उन्हें मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को उपवास रख कर पूजन कार्य करना चाहिए।

श्रीकृष्ण का कथन

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं कहा है कि, ‘महीनों में मैं मार्गशीर्ष माह हूं।’ सतयुग में देवों ने मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारंभ किया था। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्त्व बताया गया है। स्नान के समय ‘नमो नारायणाय’ या ‘गायत्री मंत्र’ का उच्चारण करना फलदायी होता है। मार्गशीर्ष माह में पूरे महीने प्रात:काल समय में भजन मंडलियां भजन-कीर्तन करती हुई निकलती हैं।

महत्त्व

जिस प्रकार कार्तिक, माघ, वैशाख आदि महीने गंगा में स्नान के लिए अति शुभ एवं उत्तम माने गए हैं, उसी प्रकार मार्गशीर्ष माह में भी गंगा स्नान का विशेष फल प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष माह की अमावस का आध्यात्मिक महत्त्व खूब रहा है। जिस दिन मार्गशीर्ष माह में अमावस तिथि हो, उस दिन स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्त्व रहता है। अमावस्या तिथि के दिन व्रत करते हुए श्रीसत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा की जाती है, जो अमोघ फलदायी होती है। इस दिन नदियों या सरोवरों में स्नान करने तथा सामथ्र्य के अनुसार दान करने से सभी पाप क्षय हो जाते हैं तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।

23 नवंबर को है अमावस्या

शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को देवों से पहले पितरों को प्रसन्न करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष हो, संतानहीन योग बन रहा हो या फिर नवम भाव में राहू नीच के होकर स्थित हो, उन व्यक्तियों को यह उपवास अवश्य रखना चाहिए। इस उपवास को करने से मनोवांछित उद्देश्य की प्राप्ति होती है। विष्णुपुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। इस बार अमावस्या 23 नवंबर को है।

अगहन माह

समस्त महीनों में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में कहा गया है कि इस माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। ज्योतिष के अनुसार इस माह की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है, जिस कारण से इस मास को मार्गशीर्ष मास कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस महीने को ‘मगसर’, ‘अगहन’ या ‘अग्रहायण’ माह भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष के महीने में स्नान एवं दान का विशेष महत्त्व होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि, ‘मार्गशीर्ष के महीने में यमुना नदी में स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूं।’ अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्त्व माना गया है।