Supreme Court: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में जल्दी पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल, पढ़ें

By: Nov 25th, 2022 12:08 am

एक दिन पहले वीआरएस, मंत्री ने नाम चुना और पीएम ने भी उसी दिन दे दी मंजूरी

कहा, हम सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि नियुक्ति में गड़बड़झाला तो नहीं

एक स्वतंत्र चयन पैनल के गठन के निर्देश की मांग पर फैसला सुरक्षित

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण गोयल की चुनाव आयुक्त के रूप में सुपर फास्ट नियुक्ति की इतनी जल्दी क्यों थी, जबकि चुनाव आयुक्त जैसे बड़े पद पर चुनाव को लेकर पहले से ही सरकार की आपत्ति रही है। पांच जजों की संविधान पीठ ने लगातार तीसरे दिन चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर कुछ तीखी टिप्पणियां जारी रखते हुए गुरुवार को सीधे अरुण गोयल की नियुक्ति से जुड़ी उन फाइलों की पड़ताल की, जो उसने केंद्र सरकार से मांगी थीं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों पर सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि बिजली की तेजी से चुनाव आयुक्त की नियुक्ति क्यों? चौबीस घंटे के भीतर ही नियुक्ति की सारी प्रक्रिया कैसे पूरी कर ली गई? किस आधार पर कानून मंत्री ने चार नाम को शॉर्टलिस्ट किया? पीठ ने कहा कि कानून मंत्री ने चुने गए चार नामों की सूची में से एक नाम चुना। इसकी फाइल 18 नवंबर को पेश की गइ और प्रधानमंत्री ने भी उसी दिन नाम की सिफारिश कर दी। पीठ ने कहा कि हम कोई टकराव नहीं चाहते, लेकिन क्या यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला था?

आखिर इतनी जल्दी क्या थी? सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बैंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह बस यह देखना चाहते हैं कि इस नियुक्ति में कोई हैंकी पैंकी यानी गड़बड़झाला तो नहीं हुआ है। बैंच ने कहा कि हम तो बस यह जानना चाहते हैं कि नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई? अगर यह नियुक्ति कानूनी तौर पर सही है, तो घबराने की क्या जरूरत है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेहतर होता कि सुनवाई के दौरान यह नियुक्ति नहीं होती। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी, जिसमें मांग की गई थी कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसा सिस्टम होना चाहिए। अरुण गोयल की नियुक्त पर विवाद इसलिए हो रहा है, क्योंकि चुनाव आयुक्त नियुक्त होने से एक दिन पहले ही उन्होंने वीआरएस यानी वॉलेंटरी रिटायरमेंट ले ली थी। गोयल इससे पहले हेवी इंडस्ट्रीज मिनिस्ट्री में सचिव थे। वह इसी साल 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले थे। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के पद पर सरकारी सेवा से रिटायर अफसर को ही रखा जाता है। उनका कार्यकाल छह साल या 65 साल की उम्र तक रहता है।

अरुण गोयल की नियुक्ति पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। भूषण ने कहा कि अदालत में सुनवाई शुरू होने के बाद सरकार ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की। जिन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है, वह गुरुवार तक केंद्र सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी थी। अचानक से उन्हें वीआरएस दिया जाता है और एक दिन में ही उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया जाता है। भूषण ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार एक ही दिन में नियुक्ति कर देती है और कोई नहीं जानता कि इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई? इस पर जस्टिस जोसेफ ने भी कहा कि किसी व्यक्ति को वीआरएस लेने में तीन महीने लगते हैं। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने एक स्वतंत्र चयन पैनल का गठन के निर्देश की मांग करने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।