जिसने सांस ली; फिर कभी उठ न पाया, हिंदोस्तान के माथे पर भयावह कलंक था भोपाल गैस कांड

By: Dec 3rd, 2022 1:40 pm

नई दिल्ली। तीन दिसंबर, 1984 का वह मनहूस दिन, जिसने हिंदोस्तान को झकझोर कर रख दिया। यह वह काला दिन था, जिसने करीब 16 हजार लोगों को मौत की नींद सुला दिया। आज भी इस दिन का याद कर रूह कांप जाती है। मध्य प्रदेश के भोपाल में यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से निकली एक ज़हरीली गैस ने कइयों के घरों को उजाड़ दिया। किसी का बेटा घर नहीं लौटा, तो किसी का सुहाग।

हादसा इतना भयावह था कि गैस के रिसाव से कई लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन का शिकार हो गए। मिथाइल आइसोसाइनाइट नामक इस गैस से तत्कालीन राज्य सरकार ने 3787 लोगों के मरने की पुष्टि की थी, लेकिन सूत्र कहते हैं कि 8000 लोगों की मौत तो दो हफ्तों के अंदर हो गई थी और लगभग इतने ही गैस से हुई बिमारियों से बाद में मर गए थे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि भोपाल गैस त्रासदी हम सब के लिए सबक है कि हमें अपनी जरूरतों के अनुसार ही प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना चाहिए।

श्री चौहान ने भोपाल गैस त्रासदी की 38वीं बरसी पर यहां सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सर्वधर्म प्रार्थना सभा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वे भोपाल गैस त्रासदी में प्राण गंवाने वाले दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी सबक है कि हम अपनी जरूरतों के अनुसार ही प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करें। सभी धर्म मानव कल्याण की कामना के साथ प्रेरित करते हैं कि हम दूसरों की पीड़ा दूर करने के लिए कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण में संतुलन हो। इंसान भी अपनी सीमा में रहे। हम पर्यावरण बचाने की अपनी ड्यूटी को पूरा करें।