अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ और JCC की बैठक पर मांगी जांच, महासंघ ने सीएम को लिखा पत्र

By: Jan 22nd, 2023 12:06 am

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला

जयराम सरकार में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के गठन व जेसीसी की बैठक पर अराजपत्रित सेवाएं कर्मचारी महासंघ ने जांच की मांग उठाई है। अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ ने सीएम सुक्खविंदर सिंह सुक्खू को इस बारे में पत्र भी लिखा है। सीएम को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर अराजपत्रित सेवाएं महासंघ का गठन किया और जेसीसी की बैठक आयोजित की। अराजपत्रित सेवाएं महासंघ के प्रदेशााध्यक्ष विनोद कुमार ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कर्मचारी संगठन और जेसीसी की मान्यता के मूल मापदडों पर प्रहार किया है। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत निष्ठाओं को तरजीह देकर शिक्षा विभाग से संबंध रखने वाले क्षेत्र विशेष के एक कर्मचारी को महासंघ की मान्यता देकर जेसीसी बुलाने का फरमान जारी किया था। इसके कारण पूरे प्रदेश का कर्मचारी सरकार के इस घोटाले से स्तब्ध रह गया। पूर्व सरकार के इस फैसले का विरोध मीडिया, ज्ञापनों और कानूनी नोटिस के जरिए कर इस अलोकतांत्रिक/ असंगत कार्रवाई को वापस लेने की मांग की गई, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने चहेतों के लिए किए गए इस घोटाले को कर्मचारियों के प्रति अपनी घृणात्मक विरोधी सोच पर ही मुहर लगा दी। जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश के कर्मचारियों ने 2021 के उप चुनाव में ही जयराम सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कर दिया था।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग उठाई हैं कि सरकार इस मामलें की जांच करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने महासंघ के संविधान के अनुसार प्रदेश के कर्मचारियों के बहुमत और सरकार के निर्धारित मापदंडों/ नियमावली के एकदम उल्ट जाकर कार्मिक विभाग से कथित महासंघ के नाम 20 जुलाई को पत्र जारी किया। महासंघ के साथ जेसीसी की मान्यता बारे जुलाई 2019 से सरकार के कार्मिक विभाग ने इस पूरे मामले को मूल नस्ति पर डील किया गया है। यह अधोहस्ताक्षरी के नेतृत्व में चुनाव की प्रोसीड्रिंग और अन्य पत्राचार इस संबंध में सरकार से किए गए हैं। उस पर कार्मिक विभाग से क्या निर्णय कार्रवाई हुई है, जबकि अधोहस्ताक्षरी के नेतृत्व में कर्मचारी महासंघ की असली निर्वाचित कार्यकारणी ने सरकार से विभिन्न स्तरों पर जेसीसी की मांग और अन्य मसले उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग उठाई हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस अनैतिक निर्णय पर सरकार शीघ्र जांच कर फैसला ले ताकि राज्य के कर्मियों में भ्रम की स्थिति खत्म हो और महासंघ का आगामी चुनाव उस कार्यकारिणी की अधिसूचना जारी कर किया जा सके।