‘आफत’ से कम नहीं टांडा के शौचालय

By: Jan 26th, 2023 12:55 am

उखड़ी हैं दीवारें, रिसता है पानी, बिजली वायरिंग की तारें भी हवा में झूल रही
पंकज राणा-टांडा
डाक्टर राजेंद्र प्रसाद आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा के शौचालयों की हालत बद से बदतर हो गई है। यहां नए शौचालय बनाने तो दूर इनकी मरम्मत तक कई साल से नहीं हो पाई है। आलम यह है कि शौचालयों की गंदगी से किसी का सिर भी चक्कर खा जाए। शौचालयों की दीवारें बुरी तरह से उखड़ चुकी हैं। चारों तरफ से गंदा पानी रिसता रहा है। एक वार्ड में 25 से 30 मरीज दाखिल रहते हैं और उन्हें एक ही शौचालय में शौच और पेशाब के लिए जाना पड़ता है। शौचालयों में गंदगी इतनी ज्यादा है कि अच्छा तंदरुस्त इंसान भी बीमार पड़ जाए। शौचालयों की दीवारों सहित छतें पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं। सारी दीवारों में सीलन ही सीलन है। पाइपें भी पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं। एक मंजिल से नीचे की मंजिलों से गुजरने वाली गंदी पाइपों से गंदे पानी का रिसाव हो रहा है और इन्हें कवर भी नहीं किया गया है। कई जगह तो बिजली की वायरिंग की तारें भी हवा में झूल रही हैं जिनसे कभी कोई अनहोनी घटना घट सकती है। शौचालयों में न तो पानी की सही व्यवस्था है और न ही सफाई ढंग से होती है। ऐसे गंदे शौचालयों में जाना मरीजों की मजबूरी है। ठंड के मौसम में उन्हें अपने बर्तन भी इन्हीं गंदे शौचालयों में ठंडे पानी से धोने पड़ते हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल तो उन मरीजों को झेलनी पड़ती है जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं और चलने फिरने में भी असमर्थ हैं।

तीमारदार मरीजों को शौचालय तक तो ले जाते हैं पर गंदगी के ढेर में शौच करना उनके लिए आफत से कम नहीं होता है। गौरतलब है कि टांडा अस्पताल में आधे हिमाचल यानी सात जिलों के मरीज टांडा अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं जिनमें चंबा, हमीरपुर, ऊना, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर और सबसे बड़े जिले 15 लाख से अधिक आबादी वाले जिला कांगडा के लोग प्रतिदिन पहुंचते हैं। इन मरीजों का मनोबल इन गंदे शौचालयों में जाकर ऐसे ही टूट जाता है। सवाल यह है कि अस्पताल प्रशासन को इसकी खबर नहीं या वह इस ओर ध्यान नहीं देना चाहता। अभी हाल ही में हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री डा. कर्नल धनी राम शांडिल ने टांडा अस्पताल का औचक निरीक्षण भी किया फिर भी अस्पताल प्रशासन को इन खस्ताहाल शौचालयों की कोई चिंता नहीं थी। ये शौचालय न जाने कितने वर्षों से ऐसे ही गंदे हाल में पड़े हुए हैं जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हैरानी की बात है कि अस्पताल में 250 से ज्यादा सफाई कर्मचारी हैैं फिर भी शौचालयों में गंदगी ऐसे फैली है जैसे यहां कोई सफाई कर्मचारी ही न हो।