हिमाचल के चार परमवीरों के नाम पर अंडमान-निकोबार के द्वीप

By: Jan 24th, 2023 12:10 am

मेजर सोमनाथ शर्मा, लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा, कैप्टन विक्रम बतरा और सूबेदार मेजर संजय सहित 21 परमवीर चक्र विजेताओं को सम्मान

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
अंडमान-निकोबार के 21 द्वीपों को सोमवार को देश के परमवीरों यानी परमवीर चक्र विजेताओं का नाम मिल गया। इनमें हिमाचल के चार परमवीर चक्र विजेता भी शामिल हैं। इनमें देश के पहले परमवीर चक्र विजेता पालमपुर के मेजर सोमनाथ शर्मा, शिमला से लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह
थापा, पालमपुर के कैप्टन विक्रम बतरा और बिलासपुर के सूबेदार मेजर संजय कुमार का नाम शामिल है। अंडमान-निकोबार के आईएनएएन 370 द्वीप को अब सोमनाथ शर्मा द्वीप, आईएनएएन 646 को धन सिंह द्वीप, आईएनएएन 417 को विक्रम बत्रा द्वीप और आईएनएएन 536 को संजय द्वीप नाम दिया गया है। कारगिल युद्ध में ये दिल मांगे मोर का विजयघोष करने वाले कैप्टन बत्रा के नाम पर अंडमान में एक पहाड़ी भी समर्पित की गई।

इसके अलावा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार और कैप्टन (तत्कालीन लांस नायक) करम सिंह, पीरू ङ्क्षसह, द्वितीय लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे, नायक जदुनाथ ङ्क्षसह, मेजर शैतान ङ्क्षसह, कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हामिद, लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर, लांस नायक अल्बर्ट एक्का, मेजर होशियार ङ्क्षसह, सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत ङ्क्षसह सेखों, मेजर रामास्वामी परमेश्वरन, नायब सूबेदार बाना ङ्क्षसह, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय और सूबेदार मेजर योगेंद्र ङ्क्षसह यादव (सेवानिवृत्त) जैसे पराक्रमी वीर सैनिकों के नाम पर द्वीपों का नामकरण किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए इस प्रोग्राम से जुड़े। पीएम मोदी ने कहा कि अंडमान की धरती पर ही सबसे पहले तिरंगा लहराया गया था।

\आजाद भारत की पहली सरकार यहीं बनी थी। 21वीं सदी का यह समय देख रहा है कि कैसे जिन नेताजी सुभाष को आजादी के बाद भुला देने का प्रयास हुआ, आज देश उन्हीं नेताजी को पल-पल याद कर रहा है। अंडमान में जिस जगह नेताजी ने सबसे पहले तिरंगा फहराया था, वहां आज गगनचुंबी तिरंगा आजाद हिंद फौज के पराक्रम का गुणगान कर रहा है। बीते आठ-नौ वर्षों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े ऐसे कितने ही काम देश में हुए हैं, जिन्हें आजादी के तुरंत बाद से हो जाना चाहिए था, लेकिन उस समय नहीं हुआ। जब मैं चार-पांच साल पहले यहां आया था, तब मैंने तीन मुख्य द्वीपों को भारतीय नाम दिए थे। 21 द्वीपों के नाम अब बदले गए हैं। इसमें कई संदेश छिपे हैं। सबसे बड़ा संदेश है एक भारत-श्रेष्ठ भारत। यह हमारी सेनाओं की बहादुरी का संदेश है।