सेंगोल पर छिड़ा वाकयुद्ध; कांग्रेस बोली; कोई दस्तावेजी सबूत नहीं, शाह बोले, भारतीय संस्कृति से नफरत क्यों

By: May 27th, 2023 12:08 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

नए संसद भवन के उद्घाटन और उसमें रखे जाने वाले सेंगोल को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। सेंगोल पर भाजपा के दावों को कांग्रेस ने झूठा करार दिया है। कांग्रेस ने दावा किया कि सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में पंडित नेहरू को सौंपने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेसियों ने सेंगोल को वॉकिंग स्टिक समझा और संग्रहालय में भेज दिया था। अमित शाह ने कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति के अपमान का आरोप लगाया। श्री शाह ने ट्वीट में लिखा कि कांग्रेस पार्टी भारतीय परंपराओं और संस्कृति से इतनी नफरत क्यों करती है? उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में तमिलनाडु के एक पवित्र शैव मठ द्वारा पंडित नेहरू को एक सेंगोल दिया गया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘छड़ी’ के रूप में एक संग्रहालय में भेज दिया। शाह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि अब, कांग्रेस ने एक और शर्मनाक हरकत की है। पवित्र शैव मठ, थिरुववदुथुराई अधीनम ने खुद भारत की आजादी के समय सेंगोल के महत्त्व के बारे में बात की थी।

कांग्रेस अधिनम के इतिहास को बोगस बता रही है! कांग्रेस को उनके व्यवहार पर विचार करने की आवश्यकता है। नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच वाकयुद्ध के बीच, शाह ने कहा कि कांग्रेस को अपने व्यवहार पर चिंतन करने की आवश्यकता है, क्योंकि उन्होंने पार्टी के इस दावे का खंडन किया कि सेंगोल के 1947 में अंग्रेजों द्वारा भारत को सत्ता का हस्तांतरण करने का प्रतीक होने का कोई सबूत नहीं था। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को ट्वीट कर दावा किया कि इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है कि माउंटबेटन, सी राजगोपालाचारी और पंडित नेहरू ने सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक कहा था। जयराम रमेश ने कहा कि मद्रास प्रांत के एक धार्मिक प्रतिष्ठान ने अगस्त, 1947 को पंडित नेहरू को यह राजदंड सौंपा था, लेकिन इसे सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में वर्णित नहीं किया गया था। कांग्रेस ने ये भी कहा कि सेंगोल मामले को उठाकर भाजपा तमिलनाडु में राजनीतिक फायदा लेना चाहती है।

बहिष्कार कर रहे दलों में लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता नहीं

भाजपा के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका वंशवादी नेतृत्व उन्हें आपस में जोड़ता है, जिनकी ‘राजशाही’ पद्धतियों का संविधान के सिद्धांतों से टकराव है। उन्होंने ट्वीट किया कि उद्घाटन समारोह का बहिष्कार कर रहे दलों में लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता नहीं है, क्योंकि उनका इकलौता उद्देश्य वंशवादियों के एक चुनिंदा समूह को बनाए रखना है। ऐसा रवैया संविधान के निर्माताओं का अपमान है। नड्डा ने कहा कि इन दलों को आत्मावलोकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वंशवादियों की अभिजात्य मानसिकता उन्हें तार्किक रूप से सोचने से रोक रही है।

स्मृति ने साधा निशाना

सेंगोल पर विपक्ष की बयानबाजी को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तंज कसा है। साथ ही उन्होंने गांधी परिवार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक आजादी का प्रतीक है, जो हमारे स्वर्णिम इतिहास का एक विशिष्ट अंग है, उस प्रतीक को गांधी खानदान ने एक म्यूजियम के किसी अंधेरे कोने में नेहरू जी की छड़ी के रूप में सालों साल तक रख रखा था।

उमर अब्दुल्ला ने नए संसद भवन को बताया प्रभावशाली

शुक्रवार को नए संसद के खूबसूरती को बयां करने वाला वीडियो सामने आया। इस नए संसद की खूबसूरती के नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला कायल हो गए हैं। जम्मू और कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नया संसद भवन आज की आवश्यकता थी। यह बहुत प्रभावशाली दिखता है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा कि एक पल के लिए उद्घाटन के मुद्दे पर होहल्ले से अलग यह भवन स्वागत योग्य है। पुराने संसद भवन ने हमारी अच्छी सेवा की है, लेकिन कुछ वर्षों तक वहां काम करने वाले व्यक्ति के रूप में हममें से बहुत से लोग अक्सर नए और बेहतर संसद भवन की आवश्यकता के बारे में आपस में बात करते थे। देर आए दुरुस्त आए बस इतना ही कहूंगा और यह बहुत प्रभावशाली लग रहा है।