पहले ही दिन टकराव, वाकआउट, काम रोको प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष ने की नारेबाजी

By: Sep 19th, 2023 12:08 am

राजेश मंढोत्रा — शिमला

हिमाचल विधानसभा में मानसून सत्र की शुरुआत हंगामे, टकराव और वाकआउट के साथ हुई है। सोमवार दोपहर बाद दो बजे सत्र की कार्यवाही शोक उद्गार प्रस्ताव के साथ शुरू हुई और सदन ने सबसे पहले आनी के दिवंगत विधायक खूबराम को याद किया। उसके बाद प्रश्नकाल शुरू हो पाता, इससे पहले भाजपा विधायकों जयराम ठाकुर, राकेश जमवाल, अनिल शर्मा, सुरेंद्र शौरी, दीपराज, विनोद कुमार, जीतराम कटवाल इत्यादि की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष को नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दे दिया गया। भाजपा विधायक इस पर चर्चा करने की मांग करने लगे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी कि प्राकृतिक आपदा पर ही कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया गया है और इसी मामले पर राज्य सरकार की ओर से नियम 102 के तहत सरकारी संकल्प लाया गया है, जिसे आज ही चर्चा के लिए रखा जाएगा। इसलिए नियम अनुसार इस मसले पर काम रोको प्रस्ताव नहीं बनता। विधानसभा अध्यक्ष कि इस व्यवस्था का विरोध नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अपने तर्कों के साथ किया। उन्होंने कहा कि सरकारी संकल्प की मंशा कुछ और है। ये अपना ठीकरा केंद्र सरकार पर फोडऩा चाहते हैं, जबकि भाजपा विधायक प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के लिए बात रखना चाह रहे हैं। इससमय में इसे महत्त्वपूर्ण कोई और मामला नहीं हो सकता।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने भी अपनी बात रखी। इस पर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि जिस विषय पर विपक्ष चर्चा चाहता है, वह आज की कार्य सूची में पहले से है। सर्वदलीय बैठक में भी यह बात हो गई थी। नेता प्रतिपक्ष को भी बता दिया गया था, लेकिन संकल्प प्रस्ताव से पहले कार्य स्थगन प्रस्ताव लाना राजनीति से प्रेरित है, जबकि आपदा के दौरान किए काम के लिए भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के अलावा नीति आयोग और वल्र्ड बैंक भी मुख्यमंत्री की तारीफ कर चुके हैं। इसके बाद विपक्ष के न मानने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि सबसे पहले आपदा राहत पर ही चर्चा करनी है, तो फिर सरकार की ओर से पेश किए गए संकल्प को ही पहले ले लेते हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री को संकल्प पेश करने के लिए कह दिया। इसका विरोध भाजपा विधायकों ने अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी के साथ किया। शोर शराबे में संकल्प पर चर्चा शुरू हो गई। इसी शोर के बीच दो बजकर 46 मिनट पर भाजपा विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। विपक्ष के सदन से बाहर जाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कहा कि यह अखबार में खबर बनाने के लिए की जा रही नौटंकी है।

जब सरकार के मंत्री और विधायक आपदा प्रभावितों को राहत देने में जुटे थे, तब भाजपा के लोग अखबारी बयान दे रहे थे। हम केंद्र सरकार से भुज और केदारनाथ आपदा की तरह विशेष पैकेज की मांग कर रहे हैं। अभी तक भाजपा विधायकों ने एक महीने की सैलरी तक आपदा राहत के लिए नहीं दी है। ऐसे में वह उन लोगों और राज्यों की सरकारों की आभारी हैं, जिन्होंने हिमाचल की मदद के लिए आपदा राहत कोष में योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित करने पर भी कांग्रेस की हाई कमान का आभार जताया। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान ही भाजपा विधायक सदन के भीतर लौट आए और फिर चर्चा में भी शामिल हुए। हालांकि विपक्ष ने एक शर्त के साथ इस संकल्प प्रस्ताव का समर्थन करने की बात कही है कि सरकार इस संकल्प प्रस्ताव में संशोधन करे और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग के बजाय केंद्र सरकार से यह आग्रह करे कि उन्हें और आर्थिक मदद दी जाए। (एचडीएम)

सीएम सुक्खू बोले, मानसून सत्र के बाद आएगा स्पेशल रिलीफ पैकेज

मानसून सत्र के पहले दिन ही आपदा पर हो रही चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने विधानसभा में स्पेशल रिलीफ पैकेज का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आंशिक तौर पर घर को नुकसान होने पर 10 हजार मिलते थे, जिसे उनकी सरकार ने एक सीमित अवधि के लिए 100000 रुपए कर दिया था। पैकेज में बदलाव को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया है, लेकिन यदि केंद्र मदद नहीं भी करेगा, तो राज्य सरकार अपने संसाधनों से हर आपदा प्रभावित की मदद करेगी। इसके लिए राजस्व मंत्री को स्पेशल रिलीफ पैकेज बनाने के लिए कहा गया है, जो इस काम पर लगे हुए हैं। राज्य सरकार 26 या 27 सितंबर को इस पैकेज की घोषणा करेगी।


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