नगर निगम मेयर चुनाव : एमएलए को वोटिंग राइट देने पर हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

By: Nov 29th, 2023 7:25 pm

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-शिमला
प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों के मेयर और डिप्टी मेयर के चुनावों में विधायकों के वोटिंग राईट को चुनौती देने वाली पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। प्रार्थी ने नगर निगमों में विधायक को मिले वोट के अधिकार के खिलाफ याचिका दायर की है। प्रार्थी ने आवदेन के माध्यम से मामले में फैसला आने तक अंतरिम राहत के तौर पर विधायकों के वोटिंग राईट पर रोक लगाने संबंधी आदेशों की मांग भी की है। कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इंकार करते हुए सरकार से प्रार्थी के इस आवेदन पर भी जवाब तलब किया।  जिला सोलन निवासी शैलेन्द्र गुप्ता ने सरकार के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें स्थानीय विधायक को मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव का अधिकार दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि सरकार के इस आदेश से मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव प्रभावित होंगे। प्रार्थी का कहना है कि सरकार की ओर से डीसी मंडी को भेजे गए आदेश में पहले विधायक को वोट का अधिकार नहीं था।

डीसी मंडी व डीसी सोलन ने 13 अक्तूबर को विधायक की वोट को लेकर क्लैरिफिकेशन मांगी थी जिसके जबाव में 21 अक्तूबर को सरकार ने डीसी मंडी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया था कि नगर निगम के मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव में विधायक को वोट का अधिकार नहीं है। इसके बाद अचानक सरकार ने 23 नवम्बर को जारी आदेश में विधायक को वोट का अधिकार दे दिया। सरकार ने यह फैसला उस समय लिया जब  24 नवम्बर को पालमपुर व 25 नवम्बर को मंडी नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव होना था। प्रार्थी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनावों को प्रभावित करने के लिए ऐन मौके पर जनविरोधी फैसला लिया। प्रार्थी ने मुख्य सचिव सहित शहरी विभाग सचिव व निदेशक को प्रतिवादी बनाया है। कोर्ट ने इन्हे नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। मामले पर 18 मार्च को सुनवाई निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट ने क्यों पूछा, शिक्षा सचिव और निदेशक को क्यों न जेल भेज दिया जाए?

शिमला प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेशों की अक्षरशः अनुपालना न होने पर शिक्षा सचिव और एलिमेंट्री शिक्षा निदेशक से पूछा है कि क्यों न उन्हें जेल भेज दिया जाए। कोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर इस बारे स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर ये प्रतिवादी अपना स्पष्टीकरण नहीं दे पाए तो यह समझा जायेगा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहना है। इसलिए मामले की अगली सुनवाई के दिन जेल जाने के लिए वे स्वयं जिम्मेवार होंगे। मामले की सुनवाई 11 दिसम्बर को निर्धारित की गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रार्थी कुलदीप चन्द द्वारा दायर अनुपालना याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की ओर से उसके पक्ष में सुनाए गए निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने पाया कि 24 अप्रैल 2014 को खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया था। प्रार्थी ने उसकी सेवाएं 95 फीसदी ग्रांट इन एड नीति के तहत बतौर नियमित अध्यापक ओवर टेक किए जाने की मांग की थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को आदेश दिए थे कि वह ओम प्रकाश बनाम राज्य सरकार वाले मामले में दिए आदेशों के दृष्टिगत प्रार्थी के मामले में भी निर्णय ले। ओम प्रकाश मामले में कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि वह प्रार्थी ओम प्रकाश को तब से नियमित नियुक्ति प्रदान करे जब से सरकार ने उसके कॉलेज को 95 फीसदी ग्रांट इन एड नीति के तहत अधिगृहीत किया था। सरकार ने उपरोक्त ओम प्रकाश मामले को खंडपीठ के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी परंतु विफल रही। यह फैसला प्रार्थी के मामले में भी लागू होना था इसलिए उसने 24 अप्रैल 2014 के फैसले को लागू करने के लिए अनुपालना याचिका दायर की थी। प्रतिवादियों को उपयुक्त समय देने के बावजूद आदेशों की अनुपालना नहीं की गई।


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