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आखिर सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है डिप्रेशन की समस्या और क्या हैं इसके लक्षण, जानें इस खबर में

By: Jan 19th, 2024 7:52 pm

डाक्टर की मानें तो सर्दियों में डिप्रेशन आमतौर पर उन देशों के लोगों को ज्यादा होता है जहां लंबे समय तक ठंड रहती है। पर आजकल के जीवन में जहां लोगों की दिनचर्या खराब है, स्ट्रेस ज्यादा है और लोग बंद घरों में रह रहे हैं, वहां सर्दियों में डिप्रेशन के लक्षण लोगों में बढऩे लगते हैं…

मौसम का प्रभाव हमारे मन पर भी पड़ता है। मौसम जैसे-जैसे बदलता है आपका मन, मस्तिष्क की गतिविधियां और होर्मोंस में बदलाव आते हैं। सर्दियां आने के साथ लोगों में उदासीनता बढ़ जाती है। ज्यादातर लोग लो फील करते हैं और उनके मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं। इसके अलावा ये डिप्रेशन के लक्षणों को भी बढ़ाता है। पर कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। डाक्टर की मानें तो सर्दियों में डिप्रेशन आमतौर पर उन देशों के लोगों को ज्यादा होता है, जहां लंबे समय तक ठंड रहती है। पर आजकल के जीवन में जहां लोगों की दिनचर्या खराब है, स्ट्रेस ज्यादा है और लोग बंद घरों में रह रहे हैं, वहां सर्दियों में डिप्रेशन के लक्षण लोगों में बढऩे लगते हैं।

हालांकि इसके पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं। इस मौसमी अवसाद को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) कहते हैं। सर्दियां आने के साथ ही दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं, जिस कारण लोगों की दिनचर्या पर प्रभाव पड़ता है। इससे लोग निराशा, एकाकीपन, अरुचि, भूख कम लगने और नकारात्मक सोच की समस्याओं से ग्रस्त होने लगते हैं। यही समस्या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर होती है। सर्दियों के दिन आपका मूड डल करने वाले होते हैं। अगर आपको अकसर तनाव की समस्या रहती है, तो सर्दियां आते ही आपकी यह समस्या और बढ़ सकती है। इस मौसम में अवसाद बढऩे के कुछ खास कारण हैं।

हार्मोन में बदलाव

सर्दी में दिन छोटे होने से मस्तिष्क के रसायन सेरोटोनिन और नोरपिनफ्राइन का बहाव तेज हो जाता है, जिस कारण लगभग हर व्यक्ति कहीं न कहीं इस अवसाद से प्रभावित होता है। दरअसल हमारे शरीर में दो प्रकार के हार्मोन बनते हैं। पहला मेलाटोनिन जो रात में बढ़ता है और दूसरा सेलाटोनिन जो दिन में बढ़ता है। हमारे सिर में एक ग्रंथि होती है, जिसे पिनियल कहते हैं। यह मेलाटोनिन नामक पदार्थ का स्राव करता है। मेलाटोनिन के असंतुलन से नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जो डिप्रेशन का कारण बनती हंै।

विटामिन डी की कमी

विटामिन डी की कमी से भी सर्दियों में डिप्रेशन होता है। दरअसल विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत सूर्य की किरणें हैं। सर्दियों में धूप कम निकलती है। अगर धूप निकल भी जाए, तो आलस की वजह से लोग अपनी रजाइयों में रहना पसंद करते हैं, धूप में नहीं बैठते। अकसर देखा गया है कि जैसे-जैसे मौसम बदलने लगता है, लोग धूप के संपर्क में आने लगते हैं, तो वो अपने आप अवसाद से बाहर निकल जाते हैं।

थकान भी होती है वजह

सर्दियों में आपके जागने और सोने का चक्र गड़बड़ा जाता है, जिससे थकान होती है। सर्दियों में जब सूरज जल्दी छिप जाता है, तो हमारा मस्तिष्क मेलाटोनिन बनाने लगता है, जिससे सांझ ढलते ही हमारा सोने का मन करता है और हम जल्दी बिस्तर में जाना चाहते हैं। सर्दियों में हमारी शारीरिक सक्रियता भी थोड़ी कम हो जाती है।

बचें इस तरह

ज्यादा तली, मैदे और शक्कर वाली चीजों से परहेज करें। फल हरी सब्जियों, सलाद का सेवन करें। खूब पानी पिएं।


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