रिटायर को दोबारा नौकरी पर डाक्टर गुस्सा, आठ फरवरी को जारी अधिसूचना पर जताई नाराजगी

By: Feb 9th, 2024 10:22 pm

हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ में रोष, आठ फरवरी को जारी अधिसूचना पर जताई नाराजगी

विशेष संवाददाता — शिमला

हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने रिटायर डाक्टरों को दोबारा तैनाती देने पर आपत्ति दर्ज की है। साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के वादे को निभाने में विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संघ का दावा है कि रिटायर डाक्टरों को दोबारा नौकरी देने से युवा प्रशिक्षित डाक्टर बेरोजगार रह जाएंगे और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। इस विषय पर शुक्रवार को हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ की बैठक अध्यक्ष डा. राजेश राणा की अध्यक्षता में हुई। डा. राजेश राणा ने कहा कि आठ फरवरी की अधिसूचना में सेवानिवृत्त चिकित्सक को दोबारा रोजगार दिया गया है। युवा चिकित्सक भी हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ की मांगों को समर्थन देने के लिए सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों का अकाल पड़ा है। इस संदर्भ में बार-बार डेपुटेशन और चिकित्सकों का स्थानांतरण किया जा रहा है। चिकित्सकों की भर्ती न होने से प्रदेश की जनता को भी बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। बार-बार डेपुटेशन लगाना और स्थानांतरित करना भी विभाग की असफलता का जीता जागता सबूत है।

इसका खामियाजा चिकित्सकों और उनके परिवारजनों के साथ ही मरीजों को भी झेलना पड़ रहा है। ऐसा करने से चिकित्सक और मरीज का गहनता और गोपनीयता का संबंध भी टूट रहा है। मरीज उनके वहां कार्यरत चिकित्सक को ही दिखाना चाहते हैं, उन्हें भी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। जिन स्वास्थ्य संस्थानों से चिकित्सकों का तबादला या डेपुटेशन की जा रही है, वहां की जनता के साथ भी सीधा-सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। चिकित्सकों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती करके इस प्रक्रिया को शीघ्र रोका जाए, ताकि चिकित्सकों को मानसिक उत्पीडऩ का और अधिक सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि जिन 24 घंटे सातों दिन के स्वास्थ्य संस्थानों में कम पद स्वीकृत हंै, वहां अन्य पद शीघ्र स्वीकृत कराए जाएं, ताकि हिमाचल की जनता को घर द्वार बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भारतीय चिकित्सा प्रणाली की नींव है, उन्हें रिक्त रखने से ग्रामीण जनता को शहरों का रुख करना पड़ रहा है। गांव से शहरों की तरफ स्वास्थ्य लाभ के लिए जाने से उनकी दिनचर्या भी खराब हो रही है और आने-जाने का खर्च भी बढ़ रहा है। सामुदायिक और नागरिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों के साथ ही अन्य कर्मचारियों के पद इंडियन पब्लिक हैल्थ स्टैंडर्ड के अनुरूप स्वीकृत नहीं हैं। कम पदों की स्वीकृति और रिक्त पदों के चलते प्रदेश की जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। संघ के महासचिव डाक्टर विकास ठाकुर ने कहा कि चिकित्सकों का काला बिल्ला लगाते हुए 23वां दिन है।


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