पूर्व सरकार ने बिना नियम दे दी तैनाती, आउटसोर्स कर्मचारियों को निकाले जाने के सवाल पर सीएम का जवाब

By: Feb 21st, 2024 12:08 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला

हिमाचल सरकार ने कोरोना काल में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में तैनात कुल 1916 आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से हटाया है। विधानसभा में भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने यह सवाल उठाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन में 1275 और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं के तहत अस्पतालों में 641 आउटसोर्स कर्मचारी रखे गए थे। इनकी नियुक्ति के समय पूर्व सरकार ने पहले कोई नियम नहीं बनाए। न ही भर्ती के लिए कोई प्रक्रिया अपनाई। इसलिए वर्तमान सरकार को इनकी सेवाएं समाप्त करने का फैसला लेना पड़ा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इन कर्मचारियों को अभी 3.50 करोड़ का भुगतान होना है, जिसे जल्द कर दिया जाएगा। यदि भविष्य में सरकार को अस्पतालों में आउटसोर्स पर लोग रखने की जरूरत पड़ी, तो उनके अनुभव को देखते हुए इन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

जयराम बोले, कोरोना काल में दी थी असाधारण सेवाएं

अनुपूरक सवाल पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी पूछा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार नहीं समझ सकती कि उसे वक्त हालात क्या थे। कोरोना के समय नियम ऐसे थे कि परिवार के लोग भी अपने मरीज को दवाई खिलाने के लिए वार्ड में नहीं जा सकते थे। ऐसे वक्त में आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में लेकर सेवाएं दी हैं। मरीज की मौत के बाद अंतिम संस्कार तक किया है। इसीलिए एमर्जेेसी जैसी स्थिति को देखते हुए वर्तमान सरकार को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी कोरोना काल की एमर्जंेसी की दुहाई देते हुए निकाले गए आउटसोर्स कर्मचारियों को नए रोजगार में प्राथमिकता देने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने फिर दरवाजा दोहराया कि भर्ती के लिए नियम जरूरी थे, लेकिन भविष्य में जरूरत हुई तो सरकार अनुभव का जरूर लाभ लेगी।

हिमाचल में 7,42,845 पंजीकृत बेरोजगार

प्रदेश सरकार ने अपने अब तक के कार्याकाल में सरकारी क्षेत्र में 3,159 और गैर सरकारी क्षेत्रों में 9,317 युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार प्रदेश की बेरोजगारी की दर 4.0 प्रतिशत है। विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को भाजपा विधायक दीप राज द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में बताया गया कि प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में 7,42,845 आवेदक पंजीकृत हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि ये सभी पंजीकृत आवेदक बेरोजगार हों। वर्तमान में प्रदेश सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में सरकारी क्षेत्र में 3159 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। गैर सरकारी क्षेत्रों में रोजगार कार्यालयों के माध्यम से 9317 युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है।

संवेदनशील सरकारी डाटा बचाने को राज्य डाटा सेंटर

संवेदनशील सरकारी डाटा और नागरिकों की जानकारी बचाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी और गवर्नेंस विभाग द्वारा राज्य डाटा सेंटर की स्थापना की गई है। हिमाचल प्रदेश राज्य डेटा सेंटर जो विभिन्न विभागों/बोर्डों निगमों की वेबसाइट और एप्लिकेशन्स को होस्ट करने के लिए बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है, ताकि जी2सी, जी2जी और जी2बी सेवाओं का वितरण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रभावी और सुरक्षित ढंग से प्रदान किया जा सके। विधानसभा के बजट सत्र में हमीरपुर सदर से विधायक द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जबाव में यह जानकारी दी गई।

जयराम बोले, सदन में कही बात का पालन करवाएं

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रश्नकाल के दौरान आउटसोर्स के मामले में चल रहे जवाब के बीच हस्तक्षेप कर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया से आग्रह किया है कि आप सदन के भीतर दिए जाने वाले आश्वासनों का पालन करवाएं। मंत्री इन आश्वासनों को इग्नोर कर रहे हैं और सवालों के जवाब में सरकार आंकड़े नहीं दे रही। इस सदन की एक गरिमा है और इससे पहले ऐसा कुछ नहीं हुआ। दुख इस बात का है कि मुख्यमंत्री से बार-बार सदन के अंदर कहने और उनके आश्वासन बाद भी मुद्दे हाल नहीं हो पा रहे हैं। सरकार किसी भी चीज के लिए गंभीर नहीं है।

प्रदेश में गोसदनों के लिए नई स्कीम लाएगी सरकार

सीएम सुक्खू बोले, प्रति गोवंश अनुदान 700 से बढ़ाकर 1200 रुपए किया

राज्य ब्यूरो प्रमुख — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार भविष्य में गोसदन बनाने के लिए नई स्कीम लाएगी। इसमें लोगों की जिम्मेदारी तय होगी और पूरी व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल अपने बजट में प्रति गोवंश सरकारी अनुदान को 700 से बढक़र 1200 रुपए करने का फैसला सरकार ने किया है। वह विधानसभा में विधायकों भुवनेश्वर गौड़, केएल ठाकुर और विनोद सुल्तानपुरी द्वारा पूछे गए सवालों में हस्तक्षेप करते हुए जवाब दे रहे थे। मनाली से विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने सवाल पूछा कि उनके चुनाव क्षेत्र में ऐसी जगह गोसदन बनाया जाए, जहां बर्फ नहीं गिरती हो। जवाब में कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि राज्य में इस वक्त कुल 261 गोसदन हैं, जिनमें से 13 पशुपालन विभाग चला रहा है। 185 गोसदन गैर सरकारी संस्थाएं चला रही हैं, जिन्हें अनुदान मिलता है, जबकि 63 संस्थाएं बिना अनुदान के गौदान चला रही हैं। इन सभी में कुल 11390 पशुओं को रखा गया है। मंत्री ने कहा कि गाय के कान पर टैग लगाने के बावजूद लोग उसे टैग को काटकर पशु को आवारा छोड़ देते हैं। इसीलिए राज्य सरकार चिप लगाने पर विचार कर रही है।

सत्ती-चंद्र कुमार के बीच भी हुए सवाल-जवाब

विधायक सतपाल सत्ती ने शिकायत की कि ऊना जिला में पंजाब और हरियाणा से रात के अंधेरे में पशुओं को छोड़ा जा रहा है। इस पर पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने यह भी कह दिया कि समाज को अपनी मानसिकता सुधारनी होगी। जवाब के दौरान चंद्र कुमार ने विपक्षी दल पर एक टिप्पणी कर दी। बाद में इसे विस अध्यक्ष ने रिकॉर्ड से हटा दिया। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब भी 15000 से ज्यादा गोवंश सडक़ पर घूम रहा है।

ज्वालामुखी गोसदन मामले की जांच होगी

अनुपूरक सवाल में ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रतन ने उनके चुनाव क्षेत्र में भाजपा सरकार के दौरान बनाए गए गोसदन में पांच करोड़ के घपले का आरोप लगाया। जवाब में कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि मैं मामले की जांच करवाऊंगा। साथ ही मंत्री ने यह शिकायत भी की कि मंदिर न्यास गोसदन को देने वाले पैसे समय पर नहीं दे रहे हैं। शराब पर लगाए गए मिल्क सेस के कारण गोसदन का खर्चा चलाया जा रहा है।

2016 का ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक बिल वापस

ड्रग्स के संदेह पर दुकान सील करने का प्रावधान चाहती थी वीरभद्र सरकार

केंद्र ने नहीं दी मंजूरी; कहा 2008 में केंद्रीय एक्ट में पहले से है ये प्रावधान

विशेष संवाददाता — शिमला

विधानसभा सदन से ध्वनि मत से औषधि और प्रसाधन सामग्री (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक 2016 विधेयक को वापस ले लिया है। इस विधेयक को पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार के समय संख्या 20 के अंतर्गत 27 अगस्त, 2016 को पारित किया गया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए राज्यपाल के कार्यालय के माध्यम से 04 नवंबर, 2016 को प्रेषित किया गया। भारत सरकार ने 25 अप्रैल, 2017 को इस संदर्भ में कुछ एक बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसे 19 सितंबर, 2017 को भारत सरकार को भेजा गया। भारत सरकार ने इस विषय पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग भारत सरकार ने स्पष्टीकरण की सूचना चाही। सूचना एकत्र करने के बाद इसे 24 जून, 2019 को पुन: भारत सरकार को भेजा गया। भारत सरकार ने 20 जून, 2022 को इस बारे अवगत करवाया कि हिमाचल प्रदेश ने जो औषधि और प्रसाधन सामग्री (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक 2016 में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। वह औषधि और प्रसाधन सामग्री (संशोधन) अधिनियम 2008 से पहले ही प्रवाधित किए जा चुके हैं। अत: प्रदेश सरकार इस विधेयक को वापस लेने के बारे में विचार करें। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि इसे देखते हुए विधेयक को वापस लेने का फैसला लिया गया है। उन्होंने इस विधेयक को सदन में रखा और ध्वनि मत से विधेयक वापस लेने का प्रस्ताव पारित हो गया।


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