इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर पॉलिसी करें बहाल, शिक्षक संगठनों ने सरकार से लगाई गुहार
प्रदेश सरकार ने पॉलिसी को फिलहाल कर दिया है स्थगित
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
प्रदेश में जिला कैडर की इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर पॉलिसी को बहाल करने की मांग फिर से उठने लगी है। शिक्षक संगठनों ने प्रदेश सरकार से जल्द इस पॉलिसी को लागू करने की मांग उठाई है। सी एंड वी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गानंद शर्मा का कहना है कि इस पॉलिसी पर रोक लगने के बाद जिलों में शिक्षकों की तबादले पर भी रोक लगी है। इस कारण म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग से जो तो तबादले होते थे, वे भी अब नहीं हो पा रहे हैं। इस साल का पांच फीसदी कोटा जो शिक्षकों को मिलता था, वह भी अब खत्म होने जा रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार जल्द इस मसले का हल निकाले। वहीं शास्त्री संस्कृत परिषद के प्रदेशाध्यक्ष मनोज शैल का कहना है कि इस पॉलिसी पर सरकार चुपी साधे हुए हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द इस पॉलिसी का समाधान निकाले जिसमें यह तय हो कि जिला में तबादलों पर सीनियोरिटी किस आधार पर मिलनी चाहिए। गौर हो कि हिमाचल सरकार ने शिक्षा विभाग में जिला कैडर वाले शिक्षकों के लिए इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर पालिसी को स्थगित किया है। सरकार के आदेशों के अनुसार इसे अगले आदेशों तक केप्ट इन अबेयन्स रखा गया है।
पूर्व जयराम सरकार के समय 20 नवंबर, 2021 को जूनियर बेसिक टीचर्स और क्लासिकल एंड वर्नाकुलर टीचर्स के लिए इस पॉलिसी में संशोधन किया गया था। यह दोनों ही टीचिंग कैडर जिला कैडर के हैं और इनमें दूसरे जिला में ट्रांसफर के लिए इंटर डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर कोटा इस्तेमाल होता है। इसके लिए पात्रता की अवधि को 13 साल से कम कर पांच साल कर दिया गया था। पॉलिसी पर रोक लगने के कारण जिला कैडर वाले जेबीटी और सी एंड वी टीचर्स को अब दूसरे जिले में ट्रांसफर करने के लिए विकल्प नहीं मिलेगा। खासकर तब तक, जब तक सरकार इस पूरे मामले की समीक्षा न कर ले। गौरतलब है कि जेबीटी एवं सी एंड वी शिक्षकों की ट्रांसफर के लिए सबसे बड़ा पेंच यही था कि दूसरे जिला में बदली किए जाने पर उनकी सीनियोरिटी का क्या होगा। अब सरकार द्वारा इस मसले का हल निकालने के बाद ही यह पॉलिसी दोबारा लागू हो सकती है।
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