नौकरी में कॉन्ट्रैक्ट की जगह नई पालिसी, SC में केस हारने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी

By: Feb 22nd, 2024 12:08 am

सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी

राज्य ब्यूरो प्रमुख — शिमला

कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी पर हिमाचल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई केस हारने के बाद हिमाचल सरकार में अनुबंध नीति के विकल्प के तौर पर सरकारी विभागों में भर्ती के लिए एक नई नीति पर काम शुरू हुआ है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में इसके लिए एक ग्रुप ऑफ सेके्रट्रीज बनाया गया है। इसमें वित्त, कार्मिक और विधि विभाग के सचिव भी शामिल होंगे। इसके पीछे, राज्य सरकार की खराब वित्तीय स्थिति को कारण बताया गया है। इस कमेटी की बैठक से पहले कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव को सरकारी विभागों में भर्ती के लिए गुजरात का मॉडल स्टडी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद यह कमेटी भर्ती की एक नई स्कीम राज्य सरकार के समक्ष रखेगी, जिस पर मंत्रिमंडल फैसला लेगा। यह स्कीम अस्थाई भर्ती की होगी या स्थाई रोजगार की, यह उसी समय स्पष्ट होगा। राज्य सरकार इससे पहले आयुर्वेद से शीला देवी और सिविल सप्लाई से ताज मोहम्मद के मामले सुप्रीम कोर्ट में हार चुकी है।

इन फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने अनुबंध अवधि को भी सीनियोरिटी और अन्य लाभ के लिए काउंट करने को कहा था। शीला देवी के केस में मुख्य सचिव ने आयुर्वेद विभाग को पूरा मामला वित्त विभाग को भेजने को कहा है, ताकि इसे लागू करने को लेकर फैसला लिया जा सके। इस मामले में अनुबंध की अवधि को पेंशन बेनिफिट के लिए काउंट करने को कहा है। दूसरी तरफ, सिविल सप्लाई से ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल सरकार के मामले में अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और संबंधित वित्तीय लाभ देने के लिए भी गिना जाएगा। इस फैसले को यदि लागू करना हो, तो इसका प्रभाव और वित्तीय भार ज्यादा है। सभी विभागों में डीपीसी और सीनियोरिटी लिस्ट बदल जाएगी। इस केस में मुख्य सचिव ने सिविल सप्लाई का मामला कार्मिक और विधि विभाग को भेजने को कहा है, ताकि मेरिट पर फैसला लिया जा सके। हालांकि इस मामले में भी हिमाचल सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी है।


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