चुनावी साल का संयमित बजट

समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार का कर्ज, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में और घटेगा और रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग को बढ़ा सकती हंै। इसका असर यह हो सकता है कि निवेशक भारत में और अधिक आकर्षित होंगे। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि अंतरिम बजट की मर्यादा रखते हुए वित्त मंत्री ने राजकोषीय संयम को दर्शाते हुए सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज पेश किया है…

हालांकि फरवरी 1, 2024 को संसद में प्रस्तुत एक अंतरिम बजट ही था, लेकिन आने वाले आम चुनावों में मात्र कुछ माह ही बचे हैं, इसलिए यह अपेक्षा की जा रही थी कि इस बजट में कुछ लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा हो सकती है। साथ ही साथ कुछ लोग मान रहे थे कि आयकर में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसी सभी संभावनाओं को नकारते हुए, अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री ने न केवल राजकोषीय संयम और विवेक का परिचय दिया है, बल्कि बजट के इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए, उन्होंने मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों के कामकाज का लेखा-जोखा तो दिया ही, अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी बताया। राजकोषीय घाटा और भी घटा : पिछले बजट में राजकोषीय घाटा के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के अनुपात में 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि चूंकि इस वर्ष नॉमिनल जीडीपी कम रहेगी, इसलिए वित्तीय घाटा अनुमान से भी अधिक हो सकता है। लेकिन हुआ यह कि संशोधित अनुमानों में यह घाटा 5.8 प्रतिशत रहने की आशा बजट में की गई है। इससे इंगित होता है कि सरकार ने वित्तीय विवेक का उपयोग करते हुए घाटे को कम रखने का प्रयास किया है। इसका कारण यह है कि सरकार के पास राजस्व पर्याप्त मात्रा में आ रहा है। देश में जो आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उसके कारण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), व्यक्तिगत आयकर, कॉर्पोरेट आयकर आदि में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सरकार का अनुमान था कि राजस्व वृद्धि की दर 10.7 प्रतिशत रहेगी, लेकिन यह वृद्धि दर 15 प्रतिशत रही है। इस बढ़ोतरी के कारण खर्च बढऩे के बावजूद वित्तीय घाटा कम रहा है।

अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार का अनुमान है कि यह घाटा 5.1 प्रतिशत रहेगा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार कर्ज का बोझ बढ़ा रही है, लेकिन अंतरिम बजट में कर्ज की सीमा 14.1 लाख करोड़ रुपए रखी गई है। जो कुल उधार है, वह 11.74 लाख करोड़ रुपए ही है। इसका अर्थ यह है कि इस वर्ष सरकार पिछले साल से भी कम कर्ज लेगी। होता यह है कि हर साल कर्ज बढ़ता रहता है। इस बार अभूतपूर्व है कि यह जीडीपी के अनुपात में कम हो रहा है। गौरतलब है कि कर्ज में कमी से महंगाई की आशंका भी कम होती है। वित्तीय घाटा और महंगाई एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए होते हैं। इस पर भी सरकार ने समुचित ध्यान रखा है। कुल मिलाकर, जो वित्तीय प्रबंधन है, अर्थव्यवस्था का प्रबंधन है, उस दृष्टि से यह जो अंतरिम बजट है, उसे कोई भी, विपक्ष भी नहीं कह सकता है कि यह एक लोकलुभावन बजट है, जो चुनावी लाभ की दृष्टि से लाया गया है। इस बात में कोई शंका नहीं कि इन सालों में देश और दुनिया के समक्ष सबसे बुरी महामारी तो देखी ही, युद्ध और तनाव की स्थितियों के कारण ग्लोबल वैल्यू चेन के ध्वस्त होने के बावजूद इस सरकार ने अत्यंत बेहतर तरीके से अर्थव्यवस्था का संचालन किया है। 2014 में दुनिया की पांच सर्वाधिक जर्जर अर्थव्यवस्थाओं में से एक से निकालकर भारत को दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में लाने का काम इस सरकार ने किया है। 2020-21 के ऋणात्मक जीडीपी संवृद्धि से बाहर निकालते हुए दुनिया की सर्वाधिक संवृद्धि दर तक लाने का श्रेय भी इस सरकार को जाता है। अर्थव्यवस्था के तमाम आयामों प्रौद्योगिकी, उद्योग, कृषि, सेवा क्षेत्र सभी में भारत आगे बढ़ा है। पिछले 4 वर्षों में लगातार पूंजीगत खर्च बढ़ाया गया है और इस साल भी उसे जारी रखा गया है और इस बार हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ के खर्च का प्रावधान रखा गया है। लोक कल्याणकारी योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण), हर घर नल से जल, उज्ज्वला योजना, सभी को बिजली, शौचालय समेत कई अन्य योजनाओं को लागू किया गया। इस अंतरिम बजट में भी इसे आगे बढ़ाया गया है। 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घरों के निर्माण, 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का कार्यक्रम तो पहले से चल रहे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का काम तो हुआ ही है, एक करोड़ लोगों को रूफ टॉप सोलर के माध्यम से मुफ्त बिजली देने का प्रावधान, मुफ्त की बिजली उपलब्ध करवाने वाले राज्यों को एक सबक भी है, जिसमें सोलर बिजली के उत्पादन के माध्यम से मुफ्त बिजली का प्रावधान है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि, जिसके माध्यम से सडक़, रेल और अन्य प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण होगा। समझना होगा कि सडक़, रेल, जल, वायु यातायात इंफ्रास्ट्रक्चर आदि सभी हमारी लॉजिस्टिक लागत को कम करता है जिससे हमारी प्रतिस्पद्र्धा शक्ति बढ़ती है, जिससे हमारे निर्यात बढ़ते हैं और आयात कम होते हैं।

रूफ टॉप सोलर के जरिए एक करोड़ लोगों को मुफ्त बिजली देने का प्रावधान : अंतरिम बजट के माध्यम से सरकार ने मुफ्त बिजली देने वालों के लिए एक नई दिशा देने का भी प्रयास किया है। कई सरकारें मुफ्त बिजली देने की तरह-तरह योजनाएं चला रही हैं। इस संबंध में यह सोचने की आवश्यकता है कि इस तरह की फ्रीबीज को बांटने के लिए धन कहां से आएगा। तो, यह प्रस्तावित किया गया है कि मुफ्त बिजली उन लोगों को दी जानी चाहिए जो अपने घरों पर सोलर पैनल लगाएं। इस प्रकार वे बिजली भी पैदा करेंगे और मुफ्त में बिजली भी हासिल करेंगे। ऐसे प्रयास से देश में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी बढ़ेगा और लोगों को नि:शुल्क बिजली भी मिलने लगेगी। हालांकि बजट प्रस्ताव में स्पष्ट नहीं है, पर अगर सरकार को सौर ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान भी देती है, तो वह लाभकारी होगा क्योंकि उसका फायदा 25-30 साल तक मुफ्त बिजली के रूप में मिलता रहेगा। ऐसी सब्सिडी दरअसल भविष्य के लिए एक निवेश साबित होगी। यह एक नई दिशा है। यह उम्मीद करनी चाहिए कि इस पर समुचित चर्चा भी होगी और इसे अमल में लाने का पूरा प्रयास भी किया जाएगा। यह उन राज्य सरकारों के लिए भी एक सबक है जो मुफ्त बिजली की व्यवस्था के लिए अंधाधुंध खर्च कर रही हैं। अब रूफ टॉप सोलर की इस योजना से सरकारी खजाने पर लगातार बोझ डाले बिना टिकाऊ आधार पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।

राजकोषीय विवेक और संयम : विपक्षी दल अक्सर यह कहते रहे हैं कि सरकार का कर्ज लगातार बढ़ रहा है। लेकिन समझना होगा कि कोविड-19 की मजबूरी के चलते केंद्र सरकार का कर्ज जीडीपी के 61 प्रतिशत पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद सरकार के राजकोषीय संयम के चलते, राजकोषीय घाटा घटते हुए अभी तक 56 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस वर्ष सरकार ने अपने कर्ज को पिछले साल से भी कम रखा है। इस बार केंद्र सरकार मात्र 14.13 लाख करोड़़ रुपए का समग्र और मात्र 11.74 लाख करोड़ रुपए का निवल ऋण लेगी। समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार का कर्ज, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में और घटेगा और रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग को बढ़ा सकती हंै। इसका असर यह हो सकता है कि निवेशक भारत में और अधिक आकर्षित होंगे। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि अंतरिम बजट की मर्यादा रखते हुए वित्त मंत्री ने राजकोषीय संयम को दर्शाते हुए सरकार की लोकलुभावन कल्याणकारी और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज पेश किया है, लोक लुभावन योजनाएं नहीं, दीर्घकाल में देश के विकास और लोगों के कल्याण का ध्यान रखा गया है।

डा. अश्वनी महाजन

कालेज प्रोफेसर


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