सपना था सडक़ बने, 60 साल के सुखलाल ने पहले खरीदी एक बीघा जमीन, फिर कर दी दान

By: Feb 11th, 2024 12:45 am

डोहरू-पट्टा-डंगार गुज्जर बस्ती की सडक़ अभी तक कच्ची, लोग हो रहे हैं परेशान
निजी संवाददाता-डंगार चौक
घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के गांव निहारी-दधोलकलां-मरयानी-डोहरू-पट्टा-डंगार गुज्जर बस्ती की जीवन रेखा कहलाई जाने वाली 7 किलोमीटर लंबी सडक़ सरकार की नजर-ए-इनायत को तरस रही है। लेकिन, विभागीय अनदेखी के चलते ये सडक़ अपनी बदनसीबी के आंसू बहा रही है। जहां से चुनाव के समय यहां सभी विधायक मंत्री आते है और सडक़ को पक्का करवाने के लिए गुज्जर बस्ती को दिलासा देकर वोट ले जाते है, परंतु विधायक व मंत्री बनने के बाद सब भूल जाते हंै। सडक़ को पक्का करने के लिए इलाके के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग सुख लाल ने एक बीघा जमीन खरीदी और वह सरकार के नाम कर दी है। लेकिन, अभी तक इस सडक़ पर तारकोल नहीं बिछ पाई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निहारी-दधोलकलां-मरयानी-डोहरू-पट्टा-डंगार के मध्य दूरी मात्र सात किलोमीटर है व इस सडक़ के बनाने का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के पास है।

जिसे पक्का करने का काम निहारी से दधोलकलां तक हुआ है और डंगार से पट्टा तक बाकी गुज्जर बस्ती तीन किलोमीटर सडक़ मरयानी-डोहरू आज तक भी कच्ची ही है। मरयानी .डोहरू गाव की तीन किलोमीटर सडक़ पर लगभग 300 की आबादी है जो अजादी के बाद से ही सडक़ के लिए तरस रहे है। बरसात के दिनों मे तो यह लोग इस सडक़ से जान नोखिम मे डालकर गुजरते है। फिर भी सडक़ की हालत नाजुक बनी हुई है। सडक़ में इतने गड्ढे पड़े हैं कि गाड़ी चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। सडक़ के बीच बीच बने खड्डे इस बस्ती लोगो को अपातकालीन समय मे वाहन चालकों के सिरदर्द बन जाती है । इस बस्ती के सुखदेव ने बताया कि वह इस सडक़ के लिए एक बीघा जमीन भी दे चुके है परंतु इसके बावजूद भी कोई भी मंत्री व विधायक इस सडक़ को पक्का करवाने मे असमर्थ है। स्थानीय लोगों बिशन दास, धर्म, प्रेमलाल, हरिलाल होशियार सिंह जगदीश चंद राकेश कुमार, व कृष्ण चंद ने बताया कि आजादी के बाद यह सडक़ ग्रामीणों के सहयोग से निकाली गई थी।

चुनावों के समय दिया जाता है महज आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार चुनाव के समय नेताओं के द्वारा सडक़ बनाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनावों के बाद कोई भी नेता गांव की तरफ नहीं देखता है। लोगों ने बताया कि नेताओं और मंत्रियों को भी गांव में सडक़ निर्माण के लिए आवेदन दिऐ गये, लेकिन इसके बावजूद भी आज तक प्रशासन ने गांव में सडक़ निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। गांव में पक्की सडक़ नहीं होने से आने-जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है। बीमारी की हालत में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। पक्की सडक़ न होने के कारण बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए गांव में कोई वाहन नहीं आता है। इससे गांव से दो किलोमीटर दूर रोड तक पैदल जाना पड़ता है। जिससे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


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