परेशानी… डाक्टर हड़ताल पर ; मरीज बेहाल

By: Feb 21st, 2024 12:18 am

मांगों को लेकर अड़े चिकित्सकों ने जिला अस्पताल बिलासपुर में की पेनडाउन स्ट्राइक, केवल इमरजेंसी मरीजों का हुआ इलाज

कार्यालय संवाददाता-बिलासपुर
क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में उपचार के लिए आने वाले लोगों को मंगलवार के दिन समस्या झेलनी पड़ी। चिकित्सकों की पेनडाऊन हड़ताल के चलते अस्पताल परिसर में बैठकर में लोग इंतजार करते रहे। चिकित्सकों की हड़ताल सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू हुई। जोकि 12 बजे खत्म हुई। चिकित्सकों ने पेनडाऊन हड़ताल के बाद मरीजों का चैकअप किया। लेकिन हड़ताल के चलते मरीजों और तीमारदारों को समस्या झेलनी पड़ी। जानकारी के अनुसार हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ की ओर से मांगे पूरी नहीं होने के चलते पेनडाऊन हड़ताल की गई। चिकित्सकों की हड़ताल से बेखबर लोग क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में उपचार के लिए पहुंचे। लेकिन उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाया। चिकित्सकों ने ओपीडी में हड़ताल के दौरान मरीजों का चैकअप नहीं किया। संघ का कहना है कि पिछले लंबे समय से चिकित्सक काले बिल्ले लगाकर विरोध कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने चिकित्सकों के मसले को गंभीरता से नहीं लिया है। जिसके चलते अब चिकित्सक संघ ने पेनडाऊन हड़ताल का निर्णय लिया। चिकित्सकों ने दोटूक कहा था कि जब तक पेनडाऊन हड़ताल के दौरान केवलमात्र आपातकाल में ही सेवाएं दी जाएंगी । इस दौरान जिला चिकित्सा अधिकारी संघ के महासचिव डा. भूपेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री को मांगों से अवगत करवाया गया है। लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।

उन्होंने कंहा कि कि यदि फिर भी बात नहीं बनी तो संघ की ओर से आंदोलन को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ की कई मांगे हैं। कई बार सरकार, उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया है। लेकिन अभी तक मांगें पूरी नहीं हो पाई हैं। 13 फरवरी को भी संघ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उम्मीद थी कि सभी मांगें पूरी होंगे। लेकिन चिकित्सकों को मायूसी ही हाथ लगी है। पिछले डेढ़ वर्ष से डिपार्टमेंटल प्रमोशनल कमेटी खंड चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नत्ति करने में असमर्थ रही है। यह कमेटी तो स्वर्ग सिधार चुके चिकित्सकों, नौकरी छोड़ चुके चिकित्सकों, मेडिकल कालेजों में काम कर रहे चिकित्सकों और जिन चिकित्सकों ने पदोन्नति नहीं लेने के लिए लिख कर दे दिया है, उनकी भी एसीआर ढूंढ रही है। ऑनलाइन मध्यम से एसीआर की बात कही गई थी, उसके बाद भी डीपीसी के माध्यम से आज तक चिकित्सकों की पदोन्नति नहीं हो पाई है। रोजगार का इंतजार कर रहे चिकित्सक भी परेशान हैं। चिकित्सकों की वरिष्ठता बनाने के भी लिए कमेटी का गठन किया गया है। लेकिन 2016 के बाद आठ साल हो गए, अब तक नहीं बन सकी है। पीजी पॉलिसी के लिए भी कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन अभी तक पीजी पॉलिसी में संशोधन नहीं हो पाया। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एड्स कंट्रोल सोसायटी का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक एवं मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्य तथा लौटने की बात कही थी, लेकिन अभी तक इस संदर्भ में भी कोई परिणाम सामने नहीं आया है।


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