किसानों के संघर्ष में दो और मौतें, युवा किसान-एक SI की गई जान, दो दिन के लिए टाला दिल्ली कूच

By: Feb 22nd, 2024 12:08 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — चंडीगढ़

केंद्र सरकार के साथ चार दौर की वार्ता विफल होने के बाद बुधवार को दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों का शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पुलिस के साथ जोरदार संघर्ष हुआ। पुलिस ने रबर बुलेट और आंसू गैस के गोले छोडक़र किसानों को दिनभर रोके रखा, तो किसानों ने पत्थरबाजी कर अपना विरोध जताया। खनौरी बॉर्डर पर हुए संघर्ष में एक युवा किसान की मौत हो गई। किसान पंजाब के बठिंडा का रहने वाला था। उसके अलावा 12 अन्य किसान भी घायल हैं, इनमें से दो की हालत गंभीर है। वहीं, टोहाना बॉर्डर पर तैनात एसआई विजय कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शंभू बॉर्डर पर लगातार आंसू गैस छोड़े जाने से किसान आंदोलन के कोऑर्डिनेटर सरवण पंधेर को आंसू गैस का एक्सप्लोजर हुआ है, उन्हें प्रदर्शन स्थल से बाहर ले जाया गया। आंदोलन के दूसरे बड़े नेता जगजीत डल्लेवाल को भी आंसू गैस की वजह से सांस लेने में प्रॉब्लम हुई है। उन्हें भी बाहर ले जाया गया। शाम होते-होते पंजाब के किसानों ने शंभू और खनौरी बॉर्डर से दिल्ली कूच करने का प्लान दो दिन के लिए टाल दिया।

किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर किसान की मौत और तनावपूर्ण हालात के बाद यह फैसला लिया है। इसी बीच किसान संगठनों ने फैसला किया है कि गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा की महाबैठक का आयोजन होगा, जिसमें आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उधर, जींद के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने बताया कि किसान आंदोलन के दौरान कुछ लोगों ने धान की पराली में आग लगाकर और मिर्ची डाल दी। इसके बाद पुलिस पर हमला कर दिया। धुआं ज्यादा होने की वजह से काफी किसानों ने तलवार, भालों और गंडासों से पुलिस पर हमला किया। हमले में 12 पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गौतलब है कि किसान आंदोलन का बुधवार को नौवां दिन था। इस दौरान अलग-अलग वजहों से तीन पुलिसकर्मियों समेत छह की मौत हो चुकी है।

पांचवें दौर की बातचीत की सरकार की पेशकश पर किसानों ने रख दी शर्त

चंडीगढ़। सरकार ने बुधवार को किसानों को पांचवें दौर की बैठक का न्योता दिया है। हालांकि किसान आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने एक शर्त रख दी है। किसानों का कहना है कि यदि आप फिर से वार्ता चाहते हैं, तो हम बैठने के लिए तैयार हैं। लेकिन इससे पहले आपको यह बताना होगा कि एमएसपी की लीगल गारंटी को लेकर आपकी क्या राय है। सरकार बताए कि वह किसानों को एमएसपी की गारंटी किस तरह से देगी।


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