लोकसभा चुनाव में इटावा बना सबसे खास

By: Apr 24th, 2024 12:06 am

अलग-अलग सीटों से आठ ने ठोंकी ताल, अखिलेश परिवार से ही अकेले पांच चुनावी रण में उतरे

लोकसभा चुनाव में यूपी का इटावा जिला खास हो गया है। यहां के रहने वाले आठ लोगों ने अलग-अलग सीटों सो संसदीय चुनाव में ताल ठोंकी है। इन आठ में पांच तो अकेले देश के सबसे बड़े सियासी घराने सैफई परिवार के ही सदस्य है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, तीन चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, आदित्य और भतीजे तेज प्रताप यादव चुनावी मैदान में है। धर्मेंद्र यादव मैनपुरी संसदीय सीट से 2004 में पहली दफा और 2009 व 2014 में धर्मेंद्र यादव दो दफा बदायूं संसदीय सीट से सांसद रह चुके हैं। 2019 में धर्मेंद्र यादव भाजपा की संघमित्रा मौर्य के मुकाबले मामूली अंतर से पराजित हो गए थे। धर्मेंद्र इस बार आजमगढ़ संसदीय सीट से चुनाव मैदान में दूसरी दफा उतरे हुए हैं। पहली दफा उपचुनाव में धर्मेंद्र यादव भाजपा के दिनेश लाल यादव के मुकाबले मामूली अंतर से पराजित हो गए थे। अक्षय यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे हैं। 2024 के संसदीय चुनाव में फिरोजाबाद सीट से एक बार फिर से सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं।

हालांकि 2019 के संसदीय चुनाव में अक्षय यादव भाजपा के चंद्रसेन जादौन के मुकाबले पराजित हो गए थे। अक्षय यादव 2014 के संसदीय चुनाव में फिरोजाबाद संसदीय सीट से सांसद बने थे। अक्षय यादव तीसरी दफा चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मैनपुरी संसदीय सीट से डिंपल को चुनाव मैदान में सपा ने दूसरी दफा उतारी हैं। दस अक्तूबर, 2022 को मुलायम यानी नेताजी के निधन के बाद हुए मैनपुरी संसदीय सीट के उपचुनाव में डिंपल को समाजवादी पार्टी ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में उतारा था। इसमें डिंपल को करीब 28800 मतों से जीत मिली थी। दूसरी दफा एक बार फिर से डिंपल यादव को ही मैनपुरी संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में उतारा गया है। डिंपल 2012 में कन्नौज संसदीय सीट से निर्विरोध सांसद चुनी जा चुकी हैं। 2019 में डिंपल भाजपा के सुब्रत पाठक के मुकाबले मामूली अंतर से पराजित हो गईं थीं। सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य बदायूं संसदीय सीट से पहली दफा मैदान में उतरे हैं। 2019 के संसदीय चुनाव में बदायूं संसदीय सीट से धर्मेंद्र यादव के पराजित हो जाने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव को टिकट दिया था, लेकिन जब नामांकन का वक्त आया, तो शिवपाल सिंह के स्थान पर उनके बेटे आदित्य का नाम घोषित कर दिया गया।

आदित्य जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ओर इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस के चैयरमैन हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के भतीजे तेज प्रताप यादव कन्नौज से प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। 2014 में नेता जी के मैनपुरी और आजमगढ़ सीट जीतने के बाद जब नेताजी ने मैनपुरी सीट छोड़ी तो तेज प्रताप को चुनाव लडऩे का मौका मिला। इसमें वह रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करने में कामयाब हुए। सैफई के ब्लॉक प्रमुख के रूप में राजनीति शुरू करने वाले तेज प्रताप बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के दामाद भी हैं। 2015 में राजलक्ष्मी से तेज प्रताप की शादी हुई थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के दिग्गज शामिल हुए थे। वहीं, इटावा के ही रहने वाले बहुजन समाज पार्टी के नेता भीमराव आंबेडकर हरदोई सुरक्षित सीट से पहली दफा कोई संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2007 में इटावा जिले की लखना विधानसभा सीट से पहली दफा विधायक बने थे। 2019 में जब सपा और बसपा का गठबंधन हुआ तो उनको राज्यसभा का चुनाव भी लड़ाया गया लेकिन प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों के आधार पर अंबेडकर पराजित हो गए।

इसके बाद उनको विधान परिषद भेज दिया गया। इसके अलावा इटावा के ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े शिव प्रसाद यादव इस बार बसपा की तरफ से डिंपल यादव के खिलाफ मैनपुरी में उतरे हैं। शिव प्रसाद यादव ने साल 2007 में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ इटावा की भरथना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन मामूली अंतर से पराजित हो गए। नेता जी ने इस सीट को छोड़ दिया तो यादव साल 2009 में बहुजन समाज पार्टी से उतरे और विधायक बने। हालांकि इसके बाद यादव ने कई चुनाव लड़े लेकिन उनको कामयाबी हासिल नहीं हुई। बसपा से मोहभंग के बाद भाजपा में आए, लेकिन चुनावी वैतरणी के मामले में भाजपा हाई कमान ने उनको तरजीह नहीं दी, तो साल 2023 में सर्वजन सुखाय नाम की एक पार्टी का गठन किया। लोकसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हुई तो बसपा का दामन थाम लिया और मैनपुरी संसदीय सीट से डिंपल के खिलाफ प्रत्याशी बन गए।

भाजपा ने एक बार फिर कठेरिया पर जताया भरोसा

इटावा के ही प्रो.रामशंकर कठेरिया भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं। कठेरिया अपने कार्यक्षेत्र आगरा से दो दफा लगातार सांसद रहने के बाद 2019 में इटावा से चुनाव लड़े जहा उनको जीत मिली। 2024 के संसदीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी में एक बार फिर से कठेरिया पर ही भरोसा जता करके टिकट दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े प्रो.कठेरिया अपने प्रारंभिक काल में इटावा में आरएसएस के नगर प्रचारक रह चुके हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में प्रो.कठेरिया मानव संसाधन विभाग में राज्यमंत्री के अलावा दो सत्र कठेरिया अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है।


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