जिभी मेले में मां-बेटे का भव्य मिलन

By: Apr 21st, 2024 12:55 am

देवता शेषनाग से मिलीं मां बूढ़ी नागिन, सालों से निभा रहीं परंपरा, लक्ष्मण रेखा खींची
स्टाफ रिपोर्टर-बंजार
उपमंडल बंजार के अंतर्गत आने वाली जिभी घाटी का आराध्य देव भगवान् शेष नाग जिभी के ऐतिहासिक मंदिर जिभी में वैशाखी मेला जिसे साते जिभी के नाम से भी जाना जाता है। मेला हर वर्ष वैसाख संक्रांति 14 अप्रैल से ध्वजा रोहण से आरंभ होता है। सात दिवसीय मेला होने के कारण साते जिभी के नाम से जाना जाता। मेले में देव परंपरा व् संस्कृति का निर्वहन किया जाता है। मेले में माता बूढ़ी नागिन जो स्थानीय देवता शेष नाग जी की माता हैं, और जिन्महें अठारह करढ़ू की माता कहा जाता है, उन्होंने शेष नाग से मिलकर मेले की शोभा बढ़ाई। मेले के अंतिम दिन विष्णु नारायण पझारी बाहु अपने धाम से जिभी मेले में आकर लक्ष्मण रेखा खींची। जिसे रेखा री जाच भी कहते है । देव मिल्न से हारयानो की समस्या का समां धान होता है। वर्षा व फसल रहती है यह जानकारी देवता शेषनाग के कारण और सत्य देव नेगी एवं माता बूढ़ी नागिन के कारदार तीवर प्रकाश ने देते हुए कहा कि यह सात दिवसीय बैसाख मेला सैंकड़ों वर्षों से बड़ी धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। इस मेले में देवता शेषनाग एवं बूढ़ी नागिन अपने सुंदर लाव लश्कर के साथ जीभी देव स्थल पर पहुंचते हैं और यहां पर देव परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस मेले में दूर.दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं इस मेले की विशेषता है कि यहां पर देवता शेषनाग एवं माता बूढी नागिन तथा अन्य घाटी के देवी देवता आते हैं। यहां पर देवता के सामने आने वाली फसल तथा अनेक प्रकार की भविष्यवाणी को सुनते हैं कि आने वाला समय कैसा होगा और आकर के कई लोगों की समस्याओं का निदान किया जाता है। कई लोगों के दुख का निवारण किया जाता है और साल भर में उनकी मनोकामना भी पूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि इस मेले की शोभा बढ़ाने वाले देवता लक्ष्मी नारायण पझारी ने भी शिरकत की है। उनके देव मिलन को देखकर के हजारों लोग भावविभोर हो गए हैं। इस मेले में देव परंपरा का निर्वहन होता है तथा व्यापार इत्यादि स्थानीय लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं अंत में सभी लोग ने देवताओं के साथ कुल्लवी नाटी का आनंद लिया।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App