CPS नियुक्तियों को चुनौती पर सुनवाई 8 तक टली

By: Apr 25th, 2024 12:08 am

विधि संवाददाता — शिमला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सीपीएस की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन दिनों से लगातार चल रही सुनवाई आगामी आठ मई के लिए टल गई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ के समक्ष 22 अप्रैल को दोपहर बाद से इन मामलों पर सुनवाई शुरू हुई थी। सोमवार को प्रार्थियों की ओर से बहस पूरी कर ली गई थी, जबकि मंगलवार और बुधवार को कुछ सीपीएस की ओर से बहस पूरी होने के बाद प्रार्थियों की ओर से भी बहस पूरी कर ली गई। अब इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से बहस की जानी है, जिसके लिए कोर्ट ने मामले को आठ मई को सूचीबद्ध करने के आदेश जारी किए हैं।

मामले पर सुनवाई के दौरान सीपीएस की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि वे केवल मंत्रियों को उनके कार्यों में सहायता प्रदान करते हैं। उनका मंत्रिमंडल के कार्यों से कोई लेना- देना नहीं है। उनकी नियुक्ति कानून के अनुसार की गई है और उनकी नियुक्ति से किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होता। प्रार्थियों की ओर से सीपीएस नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देते हुए इस कानून को बनाने की सरकार की योग्यता पर प्रश्न चिन्ह उठाया गया है। प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि प्रदेश में सीपीएस की नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है, इसलिए इनके द्वारा किया गया कार्य भी अवैध है। इतना ही नहीं, इनके द्वारा गैरकानूनी तरीके से लिया गया वेतन भी वापस लिया जाना चाहिए। प्रार्थियों की ओर से सीपीएस की नियुक्तियों पर रोक लगाने की गुहार लगाते हुए कहा गया कि इन्हें एक पल के लिए भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। बहरहाल अब मामले में सबकी निगाह आठ मई को होने वाली सुनवाई पर लगी हुई है।

निर्दलीय विधायकों की याचिका पर आज सुनवाई

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने विधायकी से इस्तीफे को मंजूरी न देने पर निर्दलीय विधायकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई। स्पीकर और विधानसभा सचिवालय की ओर से दायर याचिका का जवाब गुरुवार के लिए रिकार्ड पर लगाने के आदेश जारी किए हैं। निर्दलीय विधायकों ने इस्तीफे मंजूर न करने और उन्हें स्पीकर द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करने के खिलाफ याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को निजी तौर पर भी पार्टी बनाया गया है, परंतु कोर्ट ने उन्हें निजी तौर पर नोटिस जारी नहीं किया है। प्रार्थियों के अनुसार जब उन्होंने खुद जाकर स्पीकर के समक्ष इस्तीफे दिए, राज्यपाल को इस्तीफे की प्रतिलिपियां सौंपी, विधानसभा के बाहर इस्तीफे मंजूर न करने को लेकर धरने दिए और हाई कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, तो उनपर दबाव में आकर इस्तीफे देने का प्रश्न उठाना किसी भी तरह से तार्किक नहीं लगता और इसलिए इससे बढक़र उनकी स्वतंत्र इच्छा से बड़ा क्या सबूत हो सकता है।

प्रार्थियों का कहना था कि यदि स्पीकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए उनके इस्तीफे मंजूर नहीं करते हैं, तो हाई कोर्ट के पास यह शक्तियां हैं कि वह जरूरी आदेश पारित कर उनके इस्तीफों को मंजूरी दें। मामले के अनुसार देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, नालागढ़ से निर्दलीय विधायक केएल ठाकुर और हमीरपुर से निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा ने विधानसभा की सदस्यता से 22 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष तथा सचिव को अपने इस्तीफे सौंपे थे। इस्तीफों की एक-एक प्रति राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को भी दी थी। राज्यपाल ने भी इस्तीफों की प्रतियां विधानसभा अध्यक्ष को भेज दी थीं। प्रार्थियों का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इन्हें मंजूरी नहीं दी और इस्तीफे के कारण बताने के लिए 10 अप्रैल तक स्पष्टीकरण देने को कहा। इन विधायकों ने कारण बताओ नोटिस को खारिज कर इस्तीफे मंजूर करने की गुहार लगाई है। निर्दलीय विधायकों का कहना है कि जब उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत तौर पर मिलकर इस्तीफे दिए, तो उनके इस्तीफे मंजूर करने की जगह उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करना असंवैधानिक है।


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