तारों के मक्कडज़ाल में खोई शहर की सुंदरता

By: Apr 12th, 2024 12:55 am

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अरबों रुपए खर्चेने के बाद भी राजधानी में नहीं आया निखार
पंकज चौहान—शिमला
शिमला शहर में लोगों की सबसे बड़ी समस्या तारों का जंजाल बन गया है। पूरे शहर में तारों के मकडज़ाल से शहर की सुंदरता पर भी ग्रहण सा लग गया है। शहर में इन तारों के जंजाल से लोग भी काफी परेशान हो गए हैं, लेकिन अभी तक इन्हें हटाने के लिए न के बराबर कार्य किया गया है। शिमला शहर को सुंदर और विकसित बनाने के लिए प्रदेश सरकार कई प्रकार के प्रोजेक्ट लेकर आई, लेकिन शिमला शहर को सुंदर बनाने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अरबों रुपए शिमला शहर को मिले, लेकिन इससे भी शहर में सिर्फ लोहे के बड़े-बड़े फुटपाथ ही खड़े किए गए। इसके अलावा शहर की मुख्य समस्याओं को अभी तक दूर नहीं किया गया है। तारों के जंजाल में सबसे ज्यादा तारे टेलिकॉम कंपनियों की हैं। यह टेलिकॉम कंपनियों ने शहर के हर क्षेत्र में तारों के ढेर लगा रखे हैं। यदि इनकी पुरानी तारें खराब होती है तो वह इनकों नहीं हटाते और नई लाइन बिछा देते हैं। इससे वार्ड के घरों, रास्तों सहित
सडक़ों में भी तारों का जंजाल फैल गया है। (एचडीएम)

टेलिकॉम कंपनियों से फिर बैठक करेंगे मेयर
तारों के जंजालों को खत्म करने को लेकर महापौर सुरेंद्र चौहान अधिकारियों की बैठक भी लेने जा रहे हैं। महापौर का कहना है कि निर्देशों के बावजूद शहर से बेतरतीब तार नहीं हटाए हैं। अब जहां भी ये तार बिखरे मिलेंगे, उसे जब्त किया जाएगा। अधिकारियों के साथ मिलकर भी सख्त कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा। नगर निगम पार्षदों ने भी कंपनियों और केबल ऑपरेटरों पर कार्रवाई की मांग की है। महापौर ने कुछ महीने पहले टेलीकॉम कंपनियों और केबल ऑपरेटरों को बुलाकर इस बारे में बैठक भी की थी। इन्हें अभियान चलाकर बेतरतीब बिछे तार हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कंपनियों पर इसका असर नहीं हुआ।

तारों से उलझकर जख्मी हो रहे बुजुर्ग
पटयोग की पार्षद आशा शर्मा का कहना है कि तीन दिन पहले बीसीएस में बुजुर्ग तार से उलझकर रास्ते पर गिर गए। इससे वे जख्मी हो गए। उन्होंने कहा कि वार्ड में जगह-जगह तार के गुच्छे रास्तों पर पड़े हैं। केबल ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनी के लोग इन्हें नहीं हटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आए दिन स्कूली बच्चे भी इससे परेशान हो रहे हैं। नगर निगम को इन पर सख्ती करनी चाहिए।


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