अध्यापकों को दस्तावेज सत्यापन के जाल में न उलझाएं, शिक्षक संघ की शिक्षा मंत्री से मांग

By: Jun 10th, 2024 7:50 pm

शिक्षकों पर पड़ रहा अनावयश्क काम का बोझ

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला

उच्च शिक्षा विभाग अध्यापकों को अपने शैक्षिणक योग्यता के दस्तावेज सत्यापित करवाने के लिए आदेश जारी कर रहा है। राजकीय क्लासिकल एंड वर्णेकुलर अध्यापक संघ ने इसका विरोध किया है। शिक्षा विभाग से आग्रह किया गया है कि गत वर्ष भी ऐसे ही आदेश विभाग ने सभी स्कूलों को भेजे थे तब भी संघ के विरोध के कारण इस कार्य को रोक दिया गया था। परन्तु अब दोबारा उसी की पुनरावृत्ति करते हुए शिक्षा निदेशक की ओर से दस्तावेज सत्यापन की बात की जा रही है। विशेषकर हमीरपुर जिला में इस काम के लिए अध्यापकों पर सीमाबद्ध कर विशेष दबाव बनाया जा रहा है जो अनावश्यक परेशानी का कारण बनता जा रहा है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष दुर्गानंद शास्त्री का कहना है कि जब भी किसी भी कर्मचारी को किसी भी विभाग में नियुक्त किया जाता है तो नियुक्ति से पूर्व या कार्यभार संभालने से पूर्व सम्बंधित विभाग मुखिया सभी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को पूरी करता है। तभी उसे कार्यभार सौंपा जाता है।

अब विभाग को ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी है जो सभी अध्यापकों के दस्तावेजों का सत्यापन करवाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग इसे अतिआवश्यक समझता है तो इस कार्य को विभाग अपने स्तर पर पूरा करते हुए इस के लिए होने वाले खर्च को स्वयं वहन करे। इस कार्य के लिए जिला उप शिक्षा निदेशक स्तर पर कोई विशेष सत्यापन समिति बनाई जाए अन्यथा अध्यापक के लिए ये कार्य को केवल मात्र मानसिक प्रताडऩा से ज्यादा कुछ नही। सत्यापन केवल अध्यापकों के दस्तावेजों का ही क्यों हो सभी कार्यालयों में तैनात सभी कर्मचारियों का क्यों नही। संघ ने शिक्षा मंत्री व शिक्षा सचिव से विशेष आग्रह किया है कि ऐसे तुगलकी फरमान जारी करने के लिए विभाग पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं ताकि समस्त अध्यापक व्यर्थ के झमेलों से बच कर अपना अध्यापन कार्य लग्न और निष्ठा से कर सकें।

-सोनिया-


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