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JP नड्डा का सियासी करियर है दिलचस्प, कभी मंत्री पद से दिया था इस्तीफा

By: Jun 9th, 2024 5:21 pm

जेपी नड्डा- हिमाचल का वो नाम जो इस वक्त विश्व की सबसे बडी पार्टी के राष्ट्र अध्यक्ष हैं, हालांकि अब उनका नाम मोदी कैबिनेट में मंत्री पद के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। लगभग तय माना जा रहा है कि वो मंत्री बनेगें। नड्डा का सियासी कद काफी बड़ा है और उनका सियासी करियर भी काफी रोचक रहा है। नड्डा की बात करें तो शाह के बाद उन्होनें बीजेपी का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है, जिनकी रणनीति अक्सर बीजेपी के लिए काम करती है। हालांकि नड्डा के राजनीतिक करियर को देखें तो छात्र संगठन से सियासी करियर की शुरूआत कर हिमाचल के रहने वाले नड्डा आज राजनीतिक गलियारों में बड़ा नाम बन चुके हैं।

बता दें कि जगत प्रकाश नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 को पटना में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1975 में संपूर्ण क्रांति आंदोलन का हिस्सा बन कर की थी। इसके बाद वह अखिल भारतीय विद्यायर्थी परीशद (ABVP) में शामिल हो गए थे। जब जेपी नड्डा ने पटना विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई शुरू की थी, तब उनके पिता एनएल नड्डा विश्वविद्यालय के कुलपति थे। 1977 में जेपी नड्डा ने एबीवीपी (ABVP) के टिकट पर चुनाव लड़ा और पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव चुने गए। इसके साथ ही वह एबीवीपी में अधिक एक्टिव हो गए और कई अलग-अलग काम किए। पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने हिमाचल विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई पूरी की

हालांकि नड्डा को अपने सियासी करियर में पहली बड़ी जिम्मेदारी तब मिली जब वो 29 साल के थे। उस वक्त वर्ष 1989 में आयोजित लोकसभा चुनावों के दौरान, जेपी नड्डा को बीजेपी की युवा शाखा के चुनाव प्रभारी के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद नड्डा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

1991 में, उन्हें 31 साल की उम्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। बाद में, वह हिमाचल प्रदेश से विधानसभा चुनाव लड़े और तीन बार जीते।- 1993 से 1998, 1998 से 2003 तक और फिर 2007-2012 तक.. इस दौरान वो हिमाचल में मंत्री भी बने। नड्डा वन, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे मंत्रालयों को भी संभाला चुके हैं। वन मंत्री रहते हुए नड्डा को वन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य में प्रभावी रूप से वन पुलिस स्टेशन स्थापित करने और शिमला में हरित आवरण को बढ़ाने का भी श्रेय दिया गया है। साल 2010 के पहले तक जगत प्रसाद नड्डा यानी जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश की राजनीति तक सीमित थे, तब वह प्रेम कुमार धूमल सरकार में वन मंत्री थे। कुछ वजहों से मुख्यमंत्री धूमल के साथ मतभेद बढ़ने पर 2010 में उन्हें वन मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ जेपी नड्डा के अटूट रिश्‍ते रहे हैं।

दरअसल, नरेंद्र मोदी जब हिमाचल प्रदेश के प्रभारी हुआ करते थे उस वक्‍त नड्डा की हिमाचल प्रदेश में लोकप्रियता से बेहद प्रभावित थे। इसी दौरान दोनों नेता एक दूसरे के निकट आए, हालांकि साल 2010 के बाद से अध्यक्ष नड्डा की धाक बीजेपी में मजबूत हो गई। साल 2010 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उन्हें अपने नेतृत्व में पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया तब से नड्डा ने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति के स्तर पर पद मिलने के तुरंत बाद नड्डा अप्रैल, 2012 में राज्यसभा के सदस्य बने

उसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त जेपी नड्डा ने बीजेपी मुख्यालय से पूरे देश में पार्टी की चुनाव कैंपेनिंग की मॉनिटरिंग की थी। उस वक्त उनका काम कैंपेनिंग में जुटी विभिन्न समितियों से लेकर नेताओं की रैलियों आदि के समन्वय का था और उसके बाद जब 2014 में केंद्र में मोदी की सरकार बनी तो उन्‍हें केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बनाया गया।

पार्टी ने जनवरी, 2019 में उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर भेजा. और नड्डा के नेतृत्व में यहां बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया. हालांकि वर्ष 2019 में जब उन्‍होंने मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिली मगर 2019 में उन्हे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया और 20 जनवरी 2020 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। हालांकि अब देखना ये है कि क्या नड्डा को मंत्रीमंडल में इस बार जगह मिल पाती है या फिर नहीं।


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