पालकी में शहर की परिक्रमा करेंगी मां शूलिनी, तीन दिन रहेंगी बहन के पास

By: Jun 21st, 2024 12:16 am

सोलन की अधिष्ठात्री मां शूलिनी की नगर शोभायात्रा से आज होगा राज्य स्तरीय मेले का आगाज, प्रशासन की तैयारियां पूरी

सौरभ शर्मा-सोलन
देवभूमि के पारंपरिक एवं प्रसिद्ध मेलों में मां शूलिनी मेले का अपना एक अलग ही स्थान है। यह राज्य स्तरीय मेला 21 से 23 जून तक सोलन के ऐतिहासिक ठोडो मैदान में बड़े ही हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ मनाया जाएागा। इस दौरान मां शूलिनी अपने स्थान से पालकी में शहर की परिक्रमा करने के बाद अपनी बड़ी बहन मां दुर्गा से मिलने पहुंचेगी। तीन दिनों तक लोगों के दर्शनार्थ दुर्गा माता मंदिर में विराजमान रहेंगी। प्रशासन ने भी अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेला स्थल पर लगने वाले स्टालों के लिए भी स्थान चिन्हित कर दिए गए हैं। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था व सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल शहर के कोने-कोने में तैनात हैं मेले का इतिहास बघाट रियासत से जुड़ा हुआ है। मां शूलिनी बघाट रियासत के शासकों की कुल देवी मानी जाती है। उल्लेखनीय है कि मां शूलिनी देवी के नाम से ही सोलन का नामकरण हुआ है। बारह घाटों से मिलकर बनने वाली बघाट रियासत की नींव राजा बिजली देव ने रखी थी। शुरुआत में रियासत की राजधानी जौणाजी हुआ करती थी। उसके बाद कोटी को राजधानी बनाया गया और अंत में इस रियासत की राजधानी सोलन बनी।

राजा दुर्गा सिंह इस रियासत के अंतिम शासक थे। रियासत के विभिन्न शासकों के काल से ही माता शूलिनी का मेला आयोजित किया जा रहा है। मान्यता के अनुसार बघाट के शासक अपनी कुल देवी की प्रसन्नता के लिए प्रतिवर्ष मेले का आयोजन करते थे। लोगों का मानना है कि मां शूलिनी के प्रसन्न होने पर क्षेत्र में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा व महामारी का प्रकोप नहीं होता है बल्कि खुशहाली आती है। मेले की यह परंपरा आज भी कायम है। मां शूलिनी की अपार कृपा के कारण ही शहर समृद्धि की ओर से अग्रसर है। पहले यह मेला केवल एक दिन ही मनाया जाता था । जिला के अस्तित्व में आने के पश्चात इसका सांस्कृतिक महत्व बनाए रखने, आकर्षक बनाने व पर्यटन दृष्टि से बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान किया गया। यह मेला तीन दिनों तक मनाया जाता है। एचडीएम

मेले के लिए दुल्हन की तरह सजा शहर
तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मेले के लिए शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। शहर के पुराने बस स्टैंड से मालरोड और उपायुक्त चौक तक दोनों ओर बिजली की चमचमाती लडिय़ां लगाई गई हैं। इन लाइटों से रात के समय शहर का नजारा देखते ही बनता है। वहीं, मां शूलिनी के दरबार को भी भव्य रूप से सजाया गया है। प्रशासन ने भी अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्टालों के लिए भी स्थान चिन्हित कर दिए गए हैं।


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