जंगल में लगी अनोखी छबील, 42 डिग्री में बुझाई जंगली जानवरों की प्यास
प्रचंड गर्मी में जीवनदायिनी बनी ग्रामीणों की टीम, तीन साल से बिना सरकारी मदद के खुद भर रहे हैं जानवरों के लिए तालाब
स्टाफ रिपोर्टर – गगरेट
जिला ऊना का पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका था। सूरज की तपिश ऐसी थी कि सडक़ पर निकलने वाले राहगीर भी जगह-जगह लगी ठंडे पानी की छबीलों का सहारा लेकर राहत महसूस कर रहे थे। इसी भीषण गर्मी के बीच विकास खंड गगरेट के अंबोटा से पंजाब सीमा की ओर जाने वाले आशादेवी सडक़ मार्ग पर कुछ ट्रैक्टर पानी की टंकियां लेकर जंगल की तरफ बढ़ते दिखाई दिए। जिज्ञासावश पूछने पर जो जवाब मिला, उसने इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर दिया। पता चला कि जंगल का तालाब पूरी तरह सूख चुका है और प्यास से बेहाल जंगली जानवरों के लिए ग्रामीण अपने स्तर पर पानी पहुंचाने निकले हैं। किसी सरकारी आदेश या औपचारिक अभियान के बिना, केवल मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित होकर कुछ लोग बेजुबानों की प्यास बुझाने के लिए जंगल में मानो छबील सजाने चले थे।
जंगल में पहुंचने पर जो दृश्य सामने आया, वह दिल को सुकून देने वाला था। तालाब के आसपास कई जंगली जानवर पानी की उम्मीद में डेरा जमाए बैठे थे। सामूहिक प्रयास से जब तालाब में पानी डाला जा रहा था तो कुछ भैंसे उसमें उतरकर मस्ती करती दिखाई दीं। पक्षियों की चहचहाहट और जानवरों की बेचैनी मानो उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रही थी, जो उनकी प्यास बुझाने के लिए तपती दोपहरी में पसीना बहा रहे थे। अंबोटा निवासी तथा ग्राम पंचायत चतेहड़ के राजीव ठाकुर पिछले तीन वर्षों से गर्मी के मौसम में इस नेक कार्य को लगातार अंजाम दे रहे हैं। हर वर्ष जब प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं और जंगलों में पानी का संकट गहराने लगता है तो वह कुछ ट्रैक्टर मालिकों और सहयोगियों के साथ मिलकर तालाब को भरने का अभियान शुरू कर देते हैं।
हर साल निभा रहे इनसानियत का फर्ज
राजीव ठाकुर का कहना है कि जब इंसान गर्मी में पानी के बिना परेशान हो सकता है तो जंगलों में रहने वाले बेजुबान जीवों की पीड़ा को भी समझना जरूरी है। यही भावना उन्हें हर वर्ष इस कार्य के लिए प्रेरित करती है। इस मानवीय पहल को पूर्व विधायक राजेश ठाकुर का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। वह हर वर्ष इस अभियान में टीम का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ हर संभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
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