राधे-राधे के जयघोष से गूंजा अमलैहड़, उमड़ा जनसैलाब
आचार्य गौरदास की वाणी सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, विशाल भंडारे में सैकड़ों ने ग्रहण किया प्रसाद
स्टाफ रिपोर्टर – दौलतपुर चौक
उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा रुद्रानंद आश्रम अच्युतानन्द, अमलैहड़ में मंगलवार से श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण के बीच हुआ। इससे पहले रविवार को विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया था। वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य गौरदास जी महाराज ने कथा के प्रथम दिवस भगवान की महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मानव जीवन के महत्व का संदेश दिया। आचार्य गौरदास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने का सबसे सरल मार्ग है।
विशेष बात यह है कि आचार्य गौरदास जी महाराज मात्र सात वर्ष की आयु से श्रीमद्भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं और अमलेहड़ में आयोजित यह उनकी 1551वीं कथा है। उनकी मधुर वाणी और सरल शैली से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। परम पूज्य महाराज 1008 श्री हेमानन्द जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोडऩे का माध्यम है। उधर, कथा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम प्रबंधन द्वारा गर्मी के मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कथास्थल पर ठंडे एवं मीठे जल की छबील की विशेष व्यवस्था की गई है।
भक्ति के रंग में डूबा इलाका
आश्रम के सेवक सतपाल शास्त्री ने बताया कि 9 जून से 15 जून तक चलने वाली इस श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की अमृतमयी कथाओं का श्रवण करने और धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।
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