सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मिलेगी रफ्तार, आचार संहिता समाप्त, अब जल्द कार्यभार संभालेंगे नए सीनियर रेजिडेंट
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाणा में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द ही और मजबूती मिलने की उम्मीद है। अस्पताल में लंबे समय से रिक्त चल रहे सीनियर रेजिडेंट एसआर डॉक्टरों के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और अब प्रदेश में आचार संहिता समाप्त होने के बाद अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि चयनित डॉक्टर शीघ्र ही कार्यभार ग्रहण करेंगे। हाल ही में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय डीएमईआर हिमाचल प्रदेश द्वारा वरिष्ठ रेजिडेंट/ट्यूटर स्पेशलिस्ट पदों के लिए नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे। इसके तहत चमियाणा के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में पांच नए सीनियर रेजिडेंट नियुक्त किए गए हैं। इनमें एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में एक, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी सीटीवीएस विभाग में एक, प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दो तथा रेडियो-डायग्नोसिस विभाग में एक सीनियर रेजिडेंट शामिल हैं।
इन नियुक्तियों से अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी। वर्तमान में कई विभाग सीमित मानव संसाधनों के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे चिकित्सकों पर अतिरिक्त कार्यभार बना हुआ है। नए एसआर के ज्वाइन करने के बाद विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मरीजों को समयबद्ध एवं बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आचार संहिता लागू होने के कारण चयनित डॉक्टरों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया लंबित थी, लेकिन अब आचार संहिता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि सभी चयनित सीनियर रेजिडेंट जल्द ही अस्पताल में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देंगे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढऩे से एंडोक्राइनोलॉजी, सीटीवीएस, प्लास्टिक सर्जरी और रेडियो-डायग्नोसिस जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। इससे मरीजों को जांच, परामर्श और उपचार के लिए प्रतीक्षा अवधि में भी कमी आने की संभावना है।
वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर सुधीर शर्मा बोले
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुधीर शर्मा ने बताया कि नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं, अब आचार संहिता हटने के बाद चयनित डॉक्टरों के ज्वाइन करने की उम्मीद है। जैसे ही ज्वाइनिंग प्रक्रिया पूरी होगी, अस्पताल की विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।