पाकिस्तान को ठहराएं जवाबदेह, पीओके में सेना की बर्बरता पर भारत ने पड़ोसी देश को लगाई कड़ी फटकार

By: Jun 10th, 2026 12:06 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है। भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान हटाने के लिए फेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैला रहा है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के कुछ दिनों बाद भी वहां तनाव बना हुआ है। इस इलाके से आ रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान से आने वाली फेक न्यूज और वीडियो का एक पैटर्न देखा है और इसे अपनी नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश बताया है।

जायसवाल ने कहा कि इस संदर्भ में हम पाकिस्तान से आने वाली फेक न्यूज और वीडियो का एक पैटर्न देख रहे हैं। यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने की एक हताश कोशिश है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की कथित बर्बरता की खबरों का भी जिक्र किया और दावा किया कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की गंभीर बर्बरता की खबरें हैं। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

यह बयान रावलकोट में पाकिस्तानी बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के कुछ दिन बाद आए हैं, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 27 लोग मारे गए। जहां आधिकारिक आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 27 बताई गई है, वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में दावा किया गया है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। यह इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है क्योंकि प्रदर्शनकारी समूह पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ़ लामबंद हो रहे हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे पीओके में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित लॉन्ग मार्च को रोक देंगे, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया है।

पीओके में मानवाधिकारों के मुद्दे पर संसद में प्रस्ताव पेश, 50 सांसदों ने किया समर्थन

लंदन। ब्रिटेन में ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद इमरान हुसैन ने ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संचार बंदी और मानवाधिकारों’ के मुद्दे पर ब्रिटेन की संसद में एक अर्ली डे मोशन (ईडीएम) पेश किया है और सांसदों से इसका समर्थन करने की अपील की है। श्री हुसैन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि विदेश सचिव को भेजे गए पत्र का 50 से अधिक सांसदों द्वारा समर्थन किए जाने के बाद उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पीओके की स्थिति को लेकर यह प्रस्ताव संसद में पेश किया है। प्रस्ताव में पीओके में संचार सेवाओं के बंद रहने, लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और छापामारी की खबरों पर गंभीर चिंता जताई गई है।

इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के खिलाफ कथित रूप से अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग की निंदा की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि क्षेत्र में संचार सेवाएं बाधित होने के कारण ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी मूल के लोग तथा वहां मौजूद ब्रिटिश नागरिक अपने परिजनों और परिचितों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे चिंतित हैं। इसमें घायल लोगों के लिए चिकित्सा सुविधाओं, हिरासत में लिए गए लोगों के कानूनी अधिकारों तथा प्रशासन और नागरिक समाज के बीच संवाद की कमी पर भी ङ्क्षचता व्यक्त की गई है।


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