पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना फिर अटकी, 22वीं बार टला टेंडर
मानसून से पहले बढ़ी उद्योगों-लोगों की चिंता; एक साल से निर्माण कार्य ठप, जाम और जलभराव से बिगड़े हालात, निवेश पर विपरीत असर की चेतावनी
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-बीबीएन
बीबीएन क्षेत्र की सबसे अहम मानी जा रही पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना एक बार फिर नई डेडलाइन के साथ आगे खिसक गई है। इस बहुप्रतीक्षित सडक़ परियोजना की टेंडर प्रक्रिया अब 22वीं बार बढ़ा दी गई है। ताजा जानकारी के अनुसार अब टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 16 जून निर्धारित की गई है, जबकि टेंडर 18 जून 2026 को खोले जाने प्रस्तावित हैं।
लगातार बदलती तारीखों और बार-बार टलती प्रक्रिया के बीच क्षेत्रवासियों और उद्योग जगत की चिंता लगातार बढ़ रही है। मानसून की दस्तक के बीच जमीन पर निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में यह डर गहराता जा रहा है कि इस बार भी पिछले वर्ष जैसे हालात झेलने पड़ सकते हैं, जब अधूरी सडक़ें और जलभराव ने आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया था। करीब एक वर्ष से इस फोरलेन परियोजना का निर्माण कार्य लगभग ठप पड़ा हुआ है। जून 2025 में गुजरात की पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा लगभग 45 प्रतिशत कार्य पूरा करने के बाद परियोजना छोड़ दी गई थी। इसके बाद नई एजेंसी के चयन के लिए शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया लगातार एक्सटेंशन में उलझती चली गई। परिणामस्वरूप करीब 600 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण सडक़ परियोजना का अधूरा ढांचा आज भी लोगों और उद्योगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।
सवाल, क्या निवेश की कीमत भुगत रहे कारोबारी
बीबीएन के उद्यमियों ने फोरलेन परियोजना में लगातार देरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हजारों करोड़ रुपए के निवेश के बावजूद उन्हें खराब सडक़ व्यवस्था और धीमी ट्रांसपोर्ट प्रणाली की मार झेलनी पड़ रही है। उद्यमियों का आरोप है कि यदि समय पर बुनियादी ढांचा ही उपलब्ध नहीं कराया गया तो यह संदेश जाएगा कि क्या हिमाचल में निवेश करने की ‘सजा’ उद्योगों को भुगतनी पड़ रही है। इसका सीधा असर नए निवेश और औद्योगिक माहौल पर पड़ रहा है।
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