नाहन शहर में रियासतकालीन दौर से सुन्नी मुसलमान निभाता आ रहा मुहर्रम की परंपरा, हजरत इमाम हुसैन-उनके पुत्र की कुर्बानी को किया याद
कार्यालय संवाददाता-नाहन
मुस्लिम समाज ने शुक्रवार को देश भर की तरह ऐतिहासिक शहर नाहन में मुहर्रम का पर्व हजरत इमाम हुसैन व उनके पुत्रों व अन्य साथियों की करबला में शहीदी की शोक के तौर पर मनाया। मुस्लिम समाज का नाहन में सुन्नी समुदाय इस मुहर्रम को रियासतकालीन दौर से मनाता आ रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर शिया मुस्लिम मुहर्रम मनाता आ रहा है। इस मौके पर नाहन शहर में चार स्थानों से मुहर्रम के ताजिए निकाले गए, जोकि कच्चा टैंक स्थित जामा मस्जिद के पास एकत्रित हुए। अंजुमन इस्लामिया कमेटी के वरिष्ठ सदस्य बॉबी अहमद ने बताया कि ऐतिहासिक शहर में मुहर्रम के अवसर पर रियासतकालीन दौर से शिया मुस्लिम मुहर्रम की परंपरा को निभाता आ रहा है।
उन्होंने बताया कि नाहन शहर के गुन्नूघाट, कच्चा टैंक से ताजिए निकाले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम मुस्लिम समुदाय के लिए हजरत इमाम हुसैन उनके बेटे के अलावा अन्य साथियों की करबला में शहीदी को याद करने का अवसर है, जोकि इसी माह शहीदी हुई थी। इस दौरान गुन्नूघाट से लेकर कच्चा टैंक जामा मस्जिद तक सैकड़ों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शहादत का ताजियों के साथ विशाल जुलूस निकाला। इस बीच नाहन शहर की रियासतकालीन परंपरा के अनुसार सर्वधर्म के आपसी भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली। ताजिए में सभी धर्मों के लोग शरीक हुए। वहीं स्थान-स्थान पर स्टॉल लगाकर ताजिए के जुलूस में शरीक हुए समुदाय के लोगों को जलपान करवाया गया।