संत गौरदास बोले, ब्रह्मास्त्र की महिमा रखने को कम हुई थी परीक्षित की आयु
स्टाफ रिपोर्टर – दौलतपुर चौक
डेरा बाबा श्री रुद्रानंद आश्रम अच्युतानंद अमलैहड़ में श्री श्री 1008 स्वामी हेमानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित की जा रही रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे राष्ट्रीय संत श्री गौरदास जी महाराज ने आज परीक्षित जी को मिले श्राप के बारे में बताया कि श्राप उन्हें भगवान की कृपा से ही मिला था क्योंकि भगवान ने गर्भ में परीक्षित जी को बचा तो लिया था, किंतु ब्रह्मास्त्र की महिमा खत्म ना हो जाए इसलिए उनकी आयु 100 से 35 वर्ष रह गई थी। परीक्षित जी राजकाज के कार्य में उलझ ना जाए इसलिए उनको श्राप मिला की आज से 7 दिन बाद तक्षक के काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। इस पर परीक्षित जी ने इस श्राप से मुक्ति पाने का कोई भी प्रयास नहीं किया और गंगा किनारे आकर संतों की सभा में आकर निवेदन किया कि जिसकी 7 दिन में मृत्यु हो जाने वाली हो उसको अपने कल्याण के लिए क्या करना चाहिए। सत्संग की गंगा में डुबकी इस अवसर पर गगरेट के विधायक राकेश कालिया, एडवोकेट अश्वनी अरोडा, सतपाल शास्त्री, जीवन शर्मा, अजय शर्मा, केएल मेहता, सेवानिवृत एआर महिंद्र जसवाल, संदीप जसवाल, सुग्रीव सिंह इत्यादि मौजूद रहे।