प्राकृतिक एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान में नवीन शोध, वैश्विक सहयोग और नवाचार पर वैज्ञानिकों ने साझा किए विचार
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-सोलन
शूलिनी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, ई-युवा सेंटर और आईएचयूबी शूलिनी के संयुक्त तत्वावधान में प्राकृतिक एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान (नेचुरल एंड एप्लाइड साइंसेज) में नवीन प्रगति विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए मॉलिक्यूलर मेडिसिन, कैंसर बायोलॉजी, फाइटोकेमिस्ट्री, ड्रग डिस्कवरी और संबंधित शोध क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम विकास पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. पीके खोसला, प्रो-चांसलर प्रो. विशाल आनंद, रजिस्ट्रार डॉ. सुनील पुरी, फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में चांसलर प्रो. पीके खोसला ने स्वास्थ्य सेवाओं, फार्मास्युटिकल साइंस और सतत विकास की चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार आधारित शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी से वैज्ञानिक खोजों को समाजोपयोगी समाधान में बदला जा सकता है। फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन एवं ई-युवा सेंटर के मुख्य समन्वयक डॉ. दीपक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संवाद शोध सहयोग और अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा देता है। उन्होंने दवा खोज में प्राकृतिक उत्पादों और औषधीय पौधों की बढ़ती उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। संगोष्ठी में थाईलैंड की माए फाह लुआंग यूनिवर्सिटी के प्रो. सूरत लाफूखियो ने एनोनेसिया प्रजाति की रासायनिक विविधता और उससे विकसित बायोएक्टिव यौगिकों की संभावनाओं पर व्याख्यान दिया। वहीं, एसोसिएट डीन डॉ. कितिफोंग खोंगफिनितबुंजोंग ने मधुमक्खी स्वास्थ्य, मधुमक्खी उत्पादों और रोग प्रबंधन में हो रहे नवीन शोध पर जानकारी साझा की। शूलिनी यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार ने संभावित कैंसररोधी यौगिकों के विकास और औषधीय रसायन विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी का समापन ई-युवा सेंटर के समन्वयक डॉ. टी.एच. अभिषेक सिंह के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि यह आयोजन वैज्ञानिक संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने का प्रभावी मंच साबित हुआ।