कार्यालय संवाददाता – बिलासपुर
शहर के डियारा सेक्टर में स्थित जलमग्न शहर की प्राचीन स्मृतियों को सहेजे श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में स्थित पौराणिक एवं ऐतिहासिक खन्नमुखेश्वर शिवलिंग को नया स्वरूप मिला है। मंदिर न्यास के पुजारी पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि यह शिवलिंग छह मुखों और तीन नेत्रों से सुसज्जित है और इसे भगवान कार्तिकेय का अवतार भी माना जाता है।
भाखड़ा डैम के बनने के समय व्यास गुफा और सतलुज नदी के मध्य स्थित इस शिवलिंग को नए शहर में लाया गया था। इसकी खोज में कर्नाटक के शृंगेरी मठ के शंकराचार्य वेदांता भारती करीब दो महीने पहले यहां आए थे और उन्होंने इसे भूगर्भ में स्थापित करने का सुझाव दिया था। पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त एक्सीयन एनआर शर्मा द्वारा इसका भव्य निर्माण करवाया गया।
वास्तु दोष में सुधार
पंडित बाबू राम ने बताया कि शिवलिंग में जलैहरी पश्चिम दिशा की तरफ थी, जिसके दोष में सुधार कर अब इसे उत्तर की ओर कर दिया गया है।