पत्थरों में भी उगेंगे पौधे, बिलासपुर के जंगलों में सीड बॉल से चमत्कार

जिला की दुर्गम-पथरीली भूमि भी सहेजेगी पर्यावरण, बंदला धार सहित अन्य क्षेत्रों से होगी शुरुआत, पहले चरण में पांच हजार सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य

कार्यालय संवाददाता-बिलासपुर
जिला बिलासपुर की दुर्गम व पत्थरीली भूमि भी अब पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगी। इसके लिए वन विभाग बिलासपुर की ओर से खास योजना तैयार की गई है। वन विभाग बिलासपुर की ओर से बरसात के मौसम में पहली दफा सीड बॉल से पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से पौधारोपण के लिए सीड बॉल तैयार की जा रही है। पहले चरण में वन विभाग की ओर से पांच हजार सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सीड बॉल से पौधारोपण खासकर उन क्षेत्रों में किया जाएगा जहां पर पौधारोपण करने के लिए पहुंचना आसान नहीं होता है, वहां पर यह सीड बॉल फैंक दी जाएगी। जिला बिलासपुर में वन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से पौधरोपण की एक नई पहल शुरू करना सराहनीय प्रयास हैं। हालांकि वन विभाग की ओर से पारंपरिक पौधरोपण तो किया ही जाएगा, लेकिन इस बार सीड बॉल से भी पौधारोपण होगा। बताया जा रहा है कि इस अभियान की शुरुआत जल्द ही बिलासपुर के बंदला धार क्षेत्र से की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों की मानें तो सीड बॉल तकनीक में पेड़ों के बीजों को गीली मिट्टी और खाद के मिश्रण में लपेटकर छोटी-छोटी गेंदों का रूप दिया जाता है। इन गेंदों को सुखाने के बाद सीधे जमीन पर फेंक दिया जाता है। बारिश के मौसम में नमी मिलने पर बीज स्वत: अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी मानी जाती है, जहां सामान्य तरीके से पौधरोपण करना कठिन होता है। इन सीड बॉल में अमलतास और नीम के बीजों का प्रयोग किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पौधे प्राकृतिक रूप से विकसित हो सकें। उधर, वन मंडल अधिकारी बिलासपुर राजीव कुमार ने बताया कि जिले में इस तकनीक का पहला प्रयोग सदर बिलासपुर के बंदला धार क्षेत्र में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीड बॉल तकनीक का उपयोग विशेष रूप से पत्थरीली और दुर्गम भूमि पर किया जाएगा, जहां पारंपरिक तरीके से पौधरोपण करना कठिन होता है। वहीं फायदा होगा।