कैप्टन अमोल कालिया के साहस को सलाम

देश की रक्षा की खातिर वीर सपूत ने प्राण कर दिए न्यौछावर, विजय दिवस पर शहादत को नमन

सिटी रिपोर्टर-ऊना
कारगिल विजय दिवस पर पूरा देश उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर विजय का स्वर्णिम इतिहास रचा। ऐसे ही वीरों में मां चिंतपूर्णी की धरा से संबंधित वीर चक्र(मरणोपरांत) से सम्मानित कैप्टन अमोल कालिया का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता है। कारगिल की 16 हजार फीट ऊंची दुर्गम चोटी पर अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए उन्होंने दुश्मनों के कई सैनिकों को मार गिराया और तिरंगा फहराते हुए वीरगति प्राप्त की। कैप्टन अमोल कालिया का जन्म 26 फरवरी 1974 को पंजाब के नंगल में हुआ था। जबकि उनका पैतृक गांव जिला ऊना स्थित मां छिन्नमस्तिका चिंतपूर्णी धाम क्षेत्र में है। उनके पिता सतपाल कालिया शिक्षा जगत की जानी-मानी हस्ती रहे हैं और प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए, जबकि माता ऊषा कालिया नंगल में सेवाएं दे रही थीं। अमोल की प्रारंभिक शिक्षा फर्टिलाइजर मॉडल स्कूल नंगल में हुई। बचपन से ही उनके मन में सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सपना था।

इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने वर्ष 1991 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी(एनडीए) की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रशिक्षण के बाद भारतीय सेना में अधिकारी बने। वर्ष 1996 में उन्होंने खेमकरण सेक्टर से सैन्य सेवा की शुरुआत की। उनकी नेतृत्व क्षमता, साहस और उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें माउंटेन वारफेयर, कमांडो, पैराशूट और जंगल वारफेयर जैसे कठिन सैन्य प्रशिक्षणों के लिए चुना गया, जिन्हें उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया। कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने 16 हजार फीट ऊंची चोटी संख्या 5203 पर मजबूत बंकर बनाकर कब्जा जमाने की कोशिश की। इस रणनीतिक चोटी को दुश्मनों से मुक्त कराने की जिम्मेदारी कैप्टन अमोल कालिया और उनकी 14 सदस्यीय जांबाज टुकड़ी को सौंपी गई। संख्या और हथियारों में भारी होने के बावजूद दुश्मनों का सामना करते हुए उन्होंने असाधारण वीरता दिखाई। युद्ध के दौरान उनके साथी शहीद हो गए और स्वयं अमोल भी गोली लगने से घायल हुए। आज भी उनके पिता सतपाल कालिया भावुक होकर कहते हैं ’’अमोल तो अनमोल था। उसने देश और देशवासियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपना आज कुर्बान कर बलिदान का नया इतिहास रचा।

जेब से मिली थी चिट्टी
कैप्टन अमोल कालिया स्वामी विवेकानंद के विचारों से गहराई से प्रेरित थे। शहादत के बाद जब उनके पार्थिव शरीर की तलाशी ली गई तो उनकी जेब से स्वामी विवेकानंद का एक प्रेरक संदेश मिला। उसमें लिखा था कि विश्वास करो कि तुम महान हो और महान कार्यों के लिए ही तुम्हारा जन्म हुआ है। तुम्हारे देश को वीर नायक चाहिए, बहादुर बनो, चट्टान की तरह स्थिर रहो, मनुष्य केवल एक ही बार मरता है। यह संदेश उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण को पूरी तरह प्रतिबिंबित करता है।