खदानों में ब्लास्टिंग और मलबे से पर्यावरण व कृषि भूमि को नुकसान का आरोप, आंदोलन की दी चेतावनी
निजी संवाददाता-संगड़ाह
कफोटा उपमंडल के बागनधार खदान में भू-स्खलन से तीन लोगों की मौत के बाद संगड़ाह क्षेत्र में अवैज्ञानिक और कथित अवैध खनन के खिलाफ लोगों में रोष बढ़ गया है। रविवार को लोनिवि विश्राम गृह संगड़ाह में वसुंधरा संरक्षण समिति की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न पंचायतों के करीब 60 लोगों और भूतपूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैज्ञानिक तरीके से खनन किया जा रहा है। भारी ब्लास्टिंग और गहरी खदानों के कारण पहाड़ खोखले हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। लोगों के अनुसार खनन से निकलने वाले मलबे और सिल्ट के कारण बोरली, रेडली, लगनू, पाउरा, संगड़ाह और सींऊ गांवों की सिंचित भूमि प्रभावित हुई है। ग्रामीणों ने पानी के स्रोत सूखने और पशुओं के लिए चारे की समस्या बढऩे की बात भी कही। लोगों का कहना है कि खदानों से गिरने वाले मलबे और ओवरलोड वाहनों के कारण संगड़ाह-नाहन मार्ग पर हादसों का खतरा बना रहता है। बारिश के दौरान सडक़ बार-बार बंद होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए खनन के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पडऩे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
नई कार्यकारिणी में रणजीत चौहान अध्यक्ष
बैठक में सर्वसम्मति से वसुंधरा संरक्षण समिति की नई कार्यकारिणी गठित की गई। रणजीत चौहान को अध्यक्ष, रणदीप शर्मा को उपाध्यक्ष, सुरेंद्र सिंह कंठ को महासचिव, कपिल ठाकुर को सचिव और चेतन शर्मा को कोषाध्यक्ष चुना गया। योगेंद्र कपिला और संजय कुमार को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई।