रूई और सुई की खरीद को बाहरी मेडिकल स्टोर पर भटक रहे मरीज; इमरजेंसी में भी सामान नहीं, हमीरपुर में मरीज परेशान
स्टाफ रिपोर्टर – हमीरपुर
जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डा. राधाकृष्णन मेडिकल कालेज हमीरपुर में व्यवस्था बद से बदतर हो चली है। आलम यह है कि मेडिकल कालेज के अंदर मरीजों को रुई और सूई तक नहीं मिल पा रही है। इतने बड़े स्वास्थ्य संस्थान में छोटी चीजों के आभाव ने व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सुई और रूई वे चीजें हैं जिनकी रोजाना काफी अधिक खपत होती है। हैरानी तो इस बात की है कि इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों को भी रुई और सुई बाहरी मेडिकल स्टोर से खरीदकर लानी पड़ रही है। शायद यह पहली बार ऐसा आलम देखने को मिल रहा होगा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे छोटी तथा महत्वपूर्ण चीजें खत्म हो गई है। इन चीजों के समाप्त होने की वजह से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीज सुई और रूई के लिए मेडिकल स्टोरों पर भटक रहे हैं तदोपरांत इन्हें उपचार की सुविधा मिल रही है।
सूत्रों की माने तो कुछ दिनों से हालात ऐसे ही बने हुए हैं। वहीं मेडिकल कालेज के अंदर कुछ दवाइयों की भी कमी बताई जा रही है। इनकी आपूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विदित रहे कि मेडिकल कालेज के आपातकालीन कक्ष में दिन रात मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। बीमारी के अनुरूप चिकित्सकों की तरफ से मरीजों को इजेंक्शन लगाए जाते हैं। पहले व्यवस्था सही चल रही थी लेकिन अब सिस्टम पटरी से उतरता नजर आ रहा है। यदि किसी मरीज को इंजेक्शन लगना हो तो पहले तीमारदार को सुई का बंदोबस्त करना पड़ता है। सुई और रूई दोनों बाहरी मेडिकल स्टोर से मंगवाई जा रही है। यह आलम देखकर मरीज व्यवस्थाओं पर ही सवाल उठा रहे हैं। इनका कहना है कि जब सुई और रूई का इंतजाम सही नहीं है तो अन्य सुविधाओं का प्रबंध कैसे किया जाता होगा। यह मामला मेडिकल कालेज प्रबंधन के ध्यान में भी है लेकिन अभी तक हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। मेडिकल कालेज प्रबंधन की माने तो जल्द ही समाप्त हुई सामग्री उपलब्ध हो जाएगी लेकिन इसका आभाव रोजाना सिस्टम के पुख्ता प्रबंधों के दावों की पोल खोल हा है।
सुई और रूई की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसकी आपूर्ति मेडिकल कालेज को हो जाएगी
डा. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कालेज हमीरपुर
तीमारदार परेशान
मरीजों रमेश कुमार, सुरेश कुमार, विजय कुमार, कृष्ण चंद, विनोद कुमार, विमला देवी, सरला शर्मा, मनोज सिंह, अजय कुमार, विवेक शर्मा, अंकित कुमार आदि ने बताया कि रूई और सुई न मिलने की वजह से मरीज व उनके तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
अजब लापरवाही
यदि बात मेडिकल कालेज हमीरपुर में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों की करें तो इनकी संख्या 1200 से लेकर 1500 के बीच है। ओपीडी के बाहर मरीजों की कतारें लगी रहती हैं। बीमारी के अनुरूप मरीजों को दवाई व इंजेक्शन लिखे जाते हैं, लेकिन सुई और रूई के समाप्त होने की वजह से मरीजों को आर्थिक नुकसान झेलने के साथ ही समय की भी हानि हो रही है।