राजगढ़ में लंपी से चार पशुओं की मौत, 65 में दिखे लक्षण

पशुपालकों में चिंता का माहौल; विभाग ने टीकाकरण और निगरानी के लिए चलाया अभियान, गांंव-गांव में पहुंचीं टीमें, लोगों को किया जागरुक

निजी संवाददाता-राजगढ़
मैदानी और मध्यवर्ती क्षेत्रों के बाद अब उपमंडल राजगढ़ में भी पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के मामले सामने आने लगे हैं। क्षेत्र में अब तक करीब 60 से 65 पशुओं में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं, जबकि चार पशुओं की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों से पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि पशुपालन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण व निगरानी अभियान तेज कर दिया गया है। सीनियर वेटरनरी ऑफिसर डा. सतनाम एस. सेखों ने बताया कि लंपी पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। मामले सामने आने के बाद विभाग ने क्षेत्र में युद्धस्तर पर टीकाकरण शुरू किया है। विभागीय टीमें विभिन्न गांवों में पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं। जिन क्षेत्रों में बीमारी के मामले मिले हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है।

 प्रभावित पशुओं की पहचान कर उनका उपचार किया जा रहा है तथा पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राजगढ़ क्षेत्र में वर्तमान में 14 पशु उपचाराधीन हैं। वहीं कई प्रभावित पशु उपचार के बाद स्वस्थ होकर रिकवर कर चुके हैं। विभाग की टीमें उपचाराधीन पशुओं की स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। डा. सेखों ने पशुपालकों से अपील की कि बीमारी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे हल्के में भी न लें। पशुओं की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने से समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।

बीमारी के प्रमुख लक्षण
पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी बीमारी होने पर पशु के शरीर पर फफोले और गांठें बनने लगती हैं। इसके अलावा पशु सुस्त हो सकता है और उसकी कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों को तत्काल सतर्क हो जाना चाहिए। प्रभावित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के बाद बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। विभाग ने पशुपालकों को पशुओं के रहने वाले स्थान की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत पशुपालन विभाग को देने को कहा गया है। साथ ही बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वयं उपचार करने से बचने की अपील की गई है।