45-50 की चीनी पहुंची 70 के पार, गुलाब जामुन 300 तो 520 रुपए किलो बिक रहा कलाकंद
सिटी रिपोर्टर- धर्मशाला
शुक्रवार को रक्षाबंधन से ठीक पहले महंगाई ने भाई-बहन के इस खास त्योहार की मिठास फीकी कर दी है। चीनी के दाम अचानक बढक़र 70 रुपए किलो पहुंचने से मिठाइयों के रेट में भी उछाल आया है। वहीं खाद्य तेल महंगा होने से मिठाई कारोबारियों की लागत और बढ़ गई है। ऐसे में शुक्रवार को राखी पर बहनों को भाई की कलाई सजाने के साथ मिठाई खरीदने के लिए पहले से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। दुकानदारों के अनुसार इस बार मिठाई की खरीदारी पर महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है। जिला मुख्यालय धर्मशाला की मिठाई दुकानों में रसगुल्ला 270 से बढक़र 300 रुपए किलो पहुंच गया है, जबकि छोटा रसगुल्ला 290 से बढक़र 320 रुपए किलो हो गया है। इसी तरह सादी बर्फी के दाम 460 से बढक़र 480 रुपए, कलाकंद 490 से 520 रुपए और मिल्क केक 480 से 500 रुपए किलो पहुंच गया है।
मोतीचूर के लड्डू भी 240 से बढक़र 260 रुपए किलो हो गए हैं। वहीं, राखी पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मिठाइयों में शामिल गुलाब जामुन के दाम भी 280 से बढक़र 300 रुपए किलो हो गए हैं। जलेबी के दाम 240 से बढक़र 260 रुपए तक पहुंच गए हैं और आने वाले दिनों में इसके 280 रुपए किलो तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। मिठाई कारोबारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते तक चीनी करीब 45 से 50 रुपए किलो मिल रही थी, जो अब बढक़र 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। इसके अलावा मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला तेल का पीपा, जो पहले करीब 2100 से 2200 रुपए में आता था, अब करीब 2400 रुपए तक पहुंच गया है। यानी एक पीपे पर ही करीब 200 रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कच्चा माल महंगा होने के कारण दुकानदारों को मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। जिला मुख्यालय धर्मशाला स्थित डोगरू स्वीट्स के दुकानदार अंशुल शर्मा ने कहा कि महंगाई को देखते हुए दुकानदारों को भी उसी हिसाब से सामान तैयार करना पड़ रहा है। कल शुक्रवार को रक्षाबंधन है और हर साल की तरह इस बार भी मिठाई खरीदने के लिए ग्राहक पहुंच रहे हैं, लेकिन महंगाई का असर खरीदारी पर दिखाई दे रहा है। दुकानदार भी ग्राहकों की जेब का ध्यान रखते हुए रेट तय कर रहे हैं।
किलो की जगह आधा किलो ही मिठाई खरीद रहे ग्राहक
धर्मशाला की स्थायी निवासी एकता राजपूत ने कहा कि अचानक मिठाइयों के दाम बढऩे से परेशानी हो रही है। हर साल जहां एक किलो मिठाई खरीदते थे, इस बार महंगाई के कारण आधा किलो में ही काम चलाना पड़ रहा है। राखी का त्योहार तो हर साल की तरह मनाएंगे, लेकिन बढ़ी कीमतों ने बजट जरूर बिगाड़ दिया है।