देख लो हाल… ऊना के स्कूलों में 153 पीईटी ही नहीं

ऊना के स्कूलों में कैसे होगा खेल और फिटनेस का सपना पूरा, सरकारी स्कूलों में योजना को जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त पीटीआई शिक्षक ही नहीं

नगर संवाददाता-ऊना
स्कूलों में विद्यार्थियों को फिट रखने और उनमें खेल भावना विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने मॉर्निंग असेंबली में 15 मिनट का शारीरिक व्यायाम अनिवार्य किया है। आदेश तो जारी हो गया, लेकिन ऊना जिले के सरकारी स्कूलों में इसे जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त पीईटी शिक्षक ही नहीं हैं। जिले में पीईटी शिक्षकों के 259 स्वीकृत पदों में से 153 पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में महज 98 पीटीआई शिक्षक ही स्कूलों में शारीरिक शिक्षा और खेल गतिविधियों का जिम्मा संभाल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन स्कूलों में पीईटी ही नहीं हैं, वहां रोजाना विद्यार्थियों को निर्धारित 15 मिनट का व्यायाम कौन करवाएगा? सरकार ने मॉर्निंग असेंबली को केवल प्रार्थना और अनुशासन तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की फिटनेस से जोडऩे की पहल की है। 15 मिनट का शारीरिक व्यायाम विद्यार्थियों को स्वस्थ रखने के साथ उनकी एकाग्रता और सक्रियता बढ़ाने में मददगार माना जा रहा है। लेकिन पीईटी पदों की भारी कमी के कारण स्कूल प्रबंधन के सामने इसे नियमित रूप से लागू करना बड़ी चुनौती बन गया है।

जिन स्कूलों में पीईटी शिक्षक नहीं हैं, वहां दूसरे विषयों के शिक्षकों को विद्यार्थियों को व्यायाम करवाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इससे एक ओर शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर शारीरिक व्यायाम को सही तकनीक और निर्धारित तरीके से करवाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल में पीईटी शिक्षक की भूमिका केवल बच्चों को मैदान में ले जाकर व्यायाम कराने तक सीमित नहीं होती। वह विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों की बारीकियां सिखाता है। एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, हॉकी, फुटबॉल समेत अन्य खेलों में बच्चों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी पीईटी की होती है। इसके अलावा स्कूल स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन, खिलाडिय़ों की टीम तैयार करना, बच्चों को प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षित करना और खेल उपकरणों का रखरखाव भी पीटीआई के जिम्मे रहता है। विद्यार्थियों में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पीईटी की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा पर भी पड़ रहा है। नियमित प्रशिक्षण नहीं मिलने से प्रतिभावान खिलाड़ी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने से पहले ही पीछे रह रहे हैं। स्कूलों में फिटनेस का लक्ष्य केवल आदेश जारी करने से पूरा नहीं होगा। इसके लिए पर्याप्त पीईटी शिक्षक, खेल मैदान, उपकरण और नियमित प्रशिक्षण की जरूरत है।

खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है असर

ऊना जिले में स्वीकृत 259 पदों में से 153 पदों का रिक्त होना शारीरिक शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी कमी है। उपलब्ध 98 पीईटी शिक्षकों के भरोसे सभी स्कूलों में खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा को प्रभावी ढंग से संचालित करना आसान नहीं है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

आदेश तभी सफल, जब शिक्षक भी हों

सरकार का 15 मिनट शारीरिक व्यायाम करवाने का निर्णय विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। लेकिन विशेषज्ञों और स्कूल प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक कब उपलब्ध होंगे।

जिला ऊना के पीईटी शिक्षकों के कुल 259 पद स्वीकृत हैं। इनमें 153 पद रिक्त चल रहे हैं। 98 पीईटी शिक्षकों के पद भरे गए हैं। पीईटी शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
सोम लाल धीमान,शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक ऊना

डीपीई के 10 पद रिक्त, हो रही मुश्किल

पीटीआई शिक्षकों के अलावा ऊना के स्कूलों में डीपीआई के कुल 109 पद स्वीकृत है। जिनमें 10 पद रिक्त चल रहे हैं। डीपीआई के पद रिक्त होने से बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बढेड़ा, बाथड़ी, दलोह, गिंडपुर मलोन, जोह, कुंगड़त, पिरथीपुर, सलोह बेरी, सिंगा, टकोली में डीपीआई के पद रिक्त पड़े हुए हैं।