आईजीएमसी में पेस्ट कंट्रोल पर प्रबंधन की सफाई

873 बेड वाले संस्थान में नियमित व्यवस्था, 11 हजार रुपए प्रति व्यक्ति भुगतान की खबर को बताया भ्रामक

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
आईजीएमसी प्रबंधन ने पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अस्पताल में कीट नियंत्रण नियमित और आवश्यक व्यवस्था का हिस्सा है। इसका उद्देश्य मरीजों, तीमारदारों, कर्मचारियों और अस्पताल की संपत्ति के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखना है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि आईजीएमसी करीब नौ भवनों, मेडिकल कॉलेज के दो भवनों और बड़े परिसर में फैला है। यहां 873 बेड की क्षमता है और रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। आसपास जंगल व हरित क्षेत्र होने के कारण मच्छर, मक्खी, कॉकरोच और चूहों समेत अन्य कीटों का नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने 11 हजार रुपए प्रति व्यक्ति भुगतान की खबर को स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल किसी कर्मचारी को 11 हजार रुपये वेतन नहीं देता। पेस्ट कंट्रोल सेवा नियमानुसार टेंडर के माध्यम से कंपनी को समग्र पैकेज के रूप में दी गई है। कंपनी अपने स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके वेतन का खर्च उठाती है। वाहन, दवाइयां, उपकरण, सामग्री और लॉजिस्टिक खर्च भी कंपनी ही वहन करती है। इसलिए पूरी टेंडर राशि को किसी एक कर्मचारी की सैलरी के रूप में बताना सही नहीं है।

बड़े अस्पतालों में भी होती है पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था
प्रबंधन ने कहा कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और बड़े सरकारी अस्पतालों में भी स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और कीट नियंत्रण के लिए नियमित पेस्ट कंट्रोल सेवाएं संचालित की जाती हैं। ऐसे में आईजीएमसी में पेस्ट कंट्रोल को कोई नई या असामान्य व्यवस्था बताना उचित नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने यह भी कहा कि संस्थान में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनरी, मेडिकल उपकरण, विद्युत एवं तकनीकी प्रणालियां और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां मौजूद हैं। पेस्ट कंट्रोल का उद्देश्य केवल कीटों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि इन महंगी और महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों को कीटों से संभावित नुकसान से बचाना भी है।