खेती बचाओ-उद्योग बचाओ के नारों से गूंजा शिमला, मॉलरोड पर पुलिस रिपोर्टिंग रूम के बाहर सीटू ने किया प्रदर्शन
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
राजधानी शिमला में सोमवार को सीटू समर्थित कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों ने जेल भरो आंदोलन किया। यह आंदोलन मॉलरोड स्थित पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर किया। इस आंदोलन में करीब 400 से 500 लोगों ने भाग लिया। शिमला में सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तारियां देने पहुंचे, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन के बावजूद जिला प्रशासन ने किसी भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार नहीं किया। रिपोर्टिंग रूम में प्रदर्शन से पहले जैन धर्मशाला, रिज मैदान और इवनिंग कॉलेज से तीन अलग-अलग रैलियां निकाली गईं। रैलियां रिपोर्टिंग रूम पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गईं। यहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन सैकड़ों लोग गिरफ्तारी देने की मांग पर डटे रहे।
आंदोलन में सीटू, हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, पेंशनर एसोसिएशन, एसएफआई, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एआईएलयू, दलित शोषण मुक्ति मंच और शिमला नागरिक सभा सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, सेब उत्पादक संघ प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर और हिमाचल किसान सभा नेता संदीप वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी, मजदूर विरोधी और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त का आंदोलन आगे होने वाले बड़े संघर्ष की तैयारी है। 26 नवंबर 2026 से देशभर में खेती बचाओ, उद्योग बचाओ और भारत बचाओ के नारे के साथ व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चार लेबर कोड लागू होने से बड़ी संख्या में मजदूर श्रम कानूनों के संरक्षण से बाहर हो जाएंगे। मुक्त व्यापार समझौतों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों और उद्योगों पर संकट बढ़ेगा। हिमाचल की सेब व अन्य फल आधारित खेती भी प्रभावित होने की आशंका है। सीटू कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक मांगे नहीं मानी तो सीटू सहित सभी विभागों के सीटू समर्थित कर्मचारी हड़ताल पर डटे रहेंगे।