माजरा में कचरा प्लांट के खिलाफ आंदोलन तेज

पहली सितंबर को नालागढ़ में महापंचायत; हिमाचल-पंजाब के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-नालागढ़
हिमाचल-पंजाब सीमा से सटे माजरा क्षेत्र में कचरा प्लांट के खिलाफ करीब तीन माह से चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। धरना-प्रदर्शन कर रही महिलाओं और आंदोलन से जुड़े लोगों ने अब गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को एकजुट करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में रविवार को हिमाचल और पंजाब के सीमावर्ती गांवों में बैठकें और जनसंपर्क अभियान चलाया गया। ग्रामीणों से पहली सितंबर को नालागढ़ में प्रस्तावित महापंचायत में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की गई। रविवार को माजरा, दुर्पटा माजरा, भांगला, कश्मीरपुर और भाटियां के अलावा पंजाब के भरतगढ़ क्षेत्र के ककराला, बड़ा और हेड़ा सहित आसपास के गांवों में लोगों से संपर्क किया गया। इस दौरान महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को कचरा प्लांट से जुड़ी चिंताओं से अवगत करवाया और आंदोलन को मजबूत करने के लिए महापंचायत में भागीदारी का आह्वान किया। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि कचरा प्लांट के कारण आसपास के क्षेत्र के पर्यावरण, जलस्रोतों, कृषि भूमि और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित स्तर पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि कचरा प्लांट का मुद्दा अब केवल माजरा गांव तक सीमित नहीं रहा है। हिमाचल से सटे पंजाब के गांवों के लोग भी इसे लेकर चिंता जता रहे हैं। इसी कारण दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में आंदोलन के लिए समर्थन जुटाया जा रहा है।

नालागढ़ बस स्टैंड के पास होगी महांपचायत
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने दावा किया कि पहली सितंबर को सुबह दस बजे नालागढ़ बस स्टैंड के समीप प्रस्तावित महापंचायत में पंजाब से निहंग सिंह जत्थेबंदियों, किसान संगठनों, टैक्सी यूनियनों और पर्यावरण प्रेमियों सहित बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी एक गांव की लड़ाई नहीं, बल्कि फसलों, पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा से जुड़ा विषय है। समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आने वाली पीढय़िों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि महापंचायत के माध्यम से सरकार और प्रशासन के समक्ष ग्रामीणों की चिंताओं और मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा। उधर, नालागढ़ के पूर्व विधायक लखविंदर राणा ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए लोगों से एक सितंबर को महापंचायत में पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, जलस्रोतों, कृषि और आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।