धर्मशाला । पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता बिक्रम सिंह ठाकुर ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं कर रही है, लेकिन प्रदेश के सबसे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आम मरीजों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के सपने दिखा रही है, जबकि अस्पताल में मरीजों को पैरासिटामोल, गैस की दवा, ग्लूकोज और रोजमर्रा की जरूरी दवाइयों के लिए भी बाहर का रास्ता देखना पड़ रहा है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गरीब और मध्यम वर्ग का मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने आए तो उसे डॉक्टर, जांच और दवाइयां एक ही व्यवस्था के तहत मिलें। लेकिन आज स्थिति यह है कि मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल पहुंचने के बाद दवाइयों की पर्ची लेकर मेडिकल स्टोरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में करोड़ों रुपए की घोषणाओं और अत्याधुनिक तकनीक की बातें कर रही है। रोबोटिक सर्जरी की बातें सुनने में अच्छी लगती हैं, लेकिन सवाल यह है कि जिस अस्पताल में सामान्य मरीज को आवश्यक दवा तक उपलब्ध नहीं हो रही, वहां सरकार अपनी प्राथमिकताएं तय क्यों नहीं कर पा रही? सरकार को पहले अस्पतालों की बुनियादी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, उसके बाद बड़े प्रोजेक्ट और प्रचार की बातें करनी चाहिए।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, सफाई व्यवस्था, मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं और स्टाफ की स्थिति को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा कोई प्रचार का विषय नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन से जुड़ा सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। गरीब परिवार जब अपने मरीज को लेकर टांडा पहुंचता है तो उसे सरकार से राहत की उम्मीद होती है, लेकिन यदि उसे बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ें तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे। आज जनता उन वादों का हिसाब मांग रही है। सरकार को बताना चाहिए कि अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों की नियमित आपूर्ति क्यों नहीं हो पा रही है? कितनी दवाइयां उपलब्ध हैं, कितनी समाप्त हो चुकी हैं और किन दवाइयों की कमी चल रही है—इसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज केवल कांगड़ा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई जिलों के मरीजों के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संस्थान में यदि बुनियादी दवाइयों और आवश्यक सुविधाओं का संकट पैदा हो रहा है तो यह पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को फोटो, घोषणाओं और प्रचार से बाहर निकलकर अस्पतालों की वास्तविक स्थिति देखने के लिए जमीन पर उतरना चाहिए। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टांडा का औचक निरीक्षण करें और मरीजों से सीधे पूछें कि उन्हें इलाज के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केवल अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य व्यवस्था के बेहतर होने का दावा करना वास्तविकता से मुंह मोड़ना है।
उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल टांडा मेडिकल कॉलेज में आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए, खाली पदों को भरना चाहिए, जांच सुविधाओं को मजबूत करना चाहिए और मरीजों को मिलने वाली सभी मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा करनी चाहिए।
बिक्रम ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा आम मरीज के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देगी। सरकार बड़े-बड़े सपने दिखाने के बजाय पहले यह सुनिश्चित करे कि टांडा जैसे प्रमुख अस्पताल में गरीब मरीज को पैरासिटामोल से लेकर गंभीर बीमारी के उपचार तक आवश्यक सुविधाएं सम्मानपूर्वक और समय पर मिल सकें।
उन्होंने कहा, “रोबोटिक सर्जरी के सपने बाद में दिखाइए, पहले अस्पताल में मरीज को दवा तो उपलब्ध करवाइए। जिस सरकार में मरीज को इलाज के साथ दवा खरीदने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़े, उसके स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की असली तस्वीर टांडा मेडिकल कॉलेज खुद बयां कर रहा है।”