समाधान का मिशन फेल, 700 शिकायतें, 500 अब भी पेंडिंग

शिविरों में सुनी समस्याएं, डेढ़ साल बाद भी नहीं मिला समाधान, न निकास नालियां सुधरीं, न स्ट्रीट लाइटें, न ही पार्किंग और मैदान की मांग हुई पूरी

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
नगर निगम शिमला की ओर से शहरवासियों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने के लिए चलाया गया ‘मिशन समाधान’ अब सवालों के घेरे में आ गया है। निगम ने करीब डेढ़ साल पहले शहर के 34 वार्डों में समाधान शिविर लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी थीं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में शिकायतों का आज तक समाधान नहीं हो पाया है। तीन मार्च 2025 से 24 मार्च 2025 तक लगाए गए इन शिविरों में शहरवासियों ने करीब 700 समस्याएं निगम के समक्ष रखी थीं। करीब 200 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है जिबकी 500 शिकायतें अभी भी लंबित हैं। वहीं, जमीनी स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि कई शिकायतें आज भी जस की तस हैं। शिविरों में सडक़, नालियों, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था, पार्किंग, सामुदायिक केंद्र, बरसाती पानी की निकासी सहित कई मुद्दे उठाए गए थे।

निगम के अधिकारियों और महापौर-उपमहापौर की ओर से समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। निगम के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फर्क कृष्णानगर में सामने आया है। यहां 12 मार्च को सुनवाई हुई थी। वर्ष 2023 में करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से बना स्लॉटर हाउस जमींदोज हो गया था। स्थानीय पार्षद बिट्टू कुमार पाना ने आरोप लगाया था कि महापौर ने भवन को बचाने के लिए रिटेनिंग वॉल लगाने का आश्वासन दिया था। इसके लिए सरकार की ओर से 15 लाख रुपए का बजट भी जारी किया गया, लेकिन डेढ़ साल बाद भी रिटेनिंग वॉल का काम शुरू नहीं हुआ। बरसात और भूस्खलन के दौरान यहां भवनों को खतरा बना हुआ है।

न्यू शिमला में मैदान और पार्किंग की समस्या बरकरार

न्यू शिमला में 22 मार्च को आयोजित शिविर में लोगों ने मैदान बनाने की मांग उठाई थी। अधिकारियों ने मैदान के लिए जगह चिन्हित करने की बात कही, लेकिन आज तक मैदान तैयार नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों ने पार्किंग की समस्या भी प्रमुखता से उठाई थी, लेकिन इसका भी समाधान नहीं हुआ। शहर के अन्य वार्डों में भी नालियों की मरम्मत, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था, सामुदायिक केंद्र, शेल्टर और आवारा कुत्तों समेत कई समस्याएं लंबित बताई जा रही हैं।

शिकायतें लिखने तक सीमित रह गया समाधान

शहरवासियों का कहना है कि वे समाधान शिविरों में अपनी समस्याएं लेकर इसलिए पहुंचे थे कि मौके पर समाधान हो, लेकिन कई मामलों में शिकायतें दर्ज करने के बाद अधिकारी दोबारा नजर नहीं आए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम की ओर से वार्डों में शिविर लगाकर समस्याएं सुनने की प्रक्रिया तो हुई, लेकिन उनके समाधान की नियमित निगरानी नहीं की गई। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि धन की कमी के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। निगम की ओर से सरकार से बजट की मांग की गई है। पुरानी शिकायतों का भी समाधान किया जाएगा। अब सवाल यह है कि जब करीब डेढ़ साल पहले लोगों की समस्याएं सुनकर समाधान का भरोसा दिया गया था, तो 200 शिकायतें अब तक लंबित क्यों हैं और जिन शिकायतों के समाधान का दावा किया गया है, उनकी जमीनी स्थिति क्या है। शहरवासियों को अब शिविरों में आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर काम शुरू होने का इंतजार है।